चमियाना अस्पताल... ग्राउंड रिपोर्ट
आधे चिकित्सकों के शीतकालीन अवकाश पर जाने से ओपीडी में बढ़ा इंतजार
इन दिनों अस्पताल में मरीजों की ओपीडी का आंकड़ा 600
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में सर्दियों के मौसम में ओपीडी में उपचार करवाने आने वाले मरीजों की भले ही संख्या कम हुई है, लेकिन समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए जदोजहद करनी पड़ रही है। वहीं अस्पतालपहुंचने के बाद ओपीडी में दिखाने के लिए पहले टोकन लेने और उसके बाद पर्ची बनवाने की परीक्षा शुरू हो जाती है। मरीजों को ओपीडी में दिखाने के लिए ढाई से तीन घंटे तो कभी पांच से छह घंटे भी कुर्सी पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। मरीज और तीमारदारों भूखे प्यासे लंबा इंतजार करने को मजबूर हैं। इसकी एक मुख्य वजह आधे चिकित्सकों का शीतकालीन अवकाश पर जाना भी एक वजह है।
अस्पताल की के पर्ची काउंटर पर भीड़ पहले से कम है, लेकिन पर्ची बन जाने के बाद ओपीडी में दिखाने के लिए टोकन नंबर कब आएगा, इसके लिए मरीजों और तीमारदारों को स्क्रीन पर आ रहे नंबर पर टकटकी लगाकर घंटों अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। इसका कोई और विकल्प भी अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है। पहले कुछ विभागों की ओपीडी में दो या इससे अधिक चिकित्सकों के बैठने से नंबर जल्दी आता था, लेकिन आजकल एक या दो चिकित्सकों के ही उपलब्ध होने से इंतजार की अवधि बढ़ गई है।
स्थान : चमियाना अस्पताल, समय पूर्वाह्न 11 बजे। अस्पताल के टोकन काउंटर पर एक या दो मरीज ही खड़े हैं, लेकिन पर्ची काउंटर पर आठ से दस लोग पर्ची कटवा रहे हैं। 400 टोकन तक पर्ची बन चुकी है। पेमेंट काउंटर पर दो कतारें लगी हैं, यहां सिर्फ कैश पेमेंट हो रही है। अस्पताल के ओपीडी फ्लोर में बाहर वेटिंग एरिया में चार से पांच सौ मरीज और उनके तीमारदार हाथों में पर्ची और टोकन नंबर लेकर बैठे हैं। उनको अपने नंबर के आने का इंतजार है। ओपीडी में जाने से पहले सुरक्षा कर्मी रोक लगाकर खड़े हैं, जिसका जैसे नंबर आ रहा है, बारी-बारी टोकन नंबर और पर्ची देखकर संबंधित ओपीडी में मरीजों को भेज रहे हैं। सैकड़ों लोगों की भीड़ में बच्चे, बुढ़े, जवान हर आयु वर्ग के मरीज बैठे हैं। अस्पताल में मरीजों के लिए बैठने की व्यवस्था ठीक है।
10 बजे से ओपीडी में नंबर आने का कर रहे इंतजार : रीता देवी
ननखड़ी से अपने पति के साथ न्यूरोलॉजी ओपीडी में दिखाने आई महिला रीता देवी ने बताया कि वे सुबह 9 बजे अपने निजी वाहन से अस्पताल पहुंच गए थे। 10 बजे से टोकन पर्ची लेकर इंतजार कर रहे हैं। अब कब तक इंतजार करना पड़ेगा, इसका कोई समय तय नहीं है।
दो घंटे से कर रहे है इंतजार, लंच के बाद ही आएगा नंबर : हेम चंद
रामपुर से गेस्ट्रो एंट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में दिखाने को आए रामपुर के मरीज हेम चंद ने बताया कि पिछले दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं,। 40 नंबर है, लेकिन अभी 18वां नंबर ही आया है, इस हिसाब से लंच के बाद ही नंबर लगेगा। अब चारा भी कोई नहीं है, इंतजार करना मजबूरी है। पहले तो यहां पहुंचने में दिक्कत है। पहुंच गए तो ओपीडी में दिखाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
उपचार की सुविधा, तो है, पर परेशानी भी कम नहीं : मन्नत
एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की ओपीडी में उपचार करवाने आई मैहली की मन्नत ने बताया कि सुबह 10 बजे आ गए थे, लेकिन 12 बजने को है, लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है। उपचार की सुविधा तो है, लेकिन इसके लिए परेशान होना पड़ रहा है। अभी दस से बाहर मरीज ही ओपीडी में बुलाए गए हैं। मेरी पर्ची का नंबर 21वां है।
सुबह 7 बजे आ गए थे अस्पताल : वीना देवी
सुबह 7 बजे चमियाना पहुंच गए थे, इसलिए समय से टोकन और पर्ची बनवा ली थी। 11 बजे तक नंबर पड़ गया, यहीं से उपचार चल रहा है, तो चिकित्सक को दिखाया, यह रूटीन चेकअप था।
कच्ची सड़क पर उड़ता है धूल का गुब्बार
चमियाना अस्पताल की कच्ची सड़क में वाहनों के गुजरने से धूल मिट्टी उड़ती है। इसका यहां आने वाले मरीजों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी खराब असर पड़ रहा है। अस्पताल से करीब आधा किलोमीटर की सड़क में टारिंग होने से कुछ राहत है, लेकिन भट्ठाकुफर तक की सड़क के कच्चे हिस्से में जमकर धूल मिट्टी उड़ रही है। कई बार तो वाहन के गुजरने पर उड़ने वाली धूल से सड़क ही नजर नहीं आती। हालांकि सड़क पर कभी कभार पानी का छिड़काव किया जाता है, जिससे कुछ समय के लिए मिट्टी बैठ जाती है, लेकिन फिर वही हालात हो जाते हैं।
चमियाना अस्पताल में वाहन पार्किंग बड़ी चुनौती
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में अधिकतर मरीज यहां के लिए अपर्याप्त परिवहन व्यवस्था, बसों के न चलने के कारण अपने निजी वाहनों या टैक्सी किराये पर लेकर ही उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल पहुंचने के बाद निजी वाहनों और टैक्सियों को पार्क करने के लिए जगह खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है। अस्पताल में मरीजों के सैकड़ों वाहनों को पार्क करने के लिए कोई पार्किग नहीं है, इसलिए वाहन लेकर जाने वाले लोगों को पहुंचते ही सड़क के किनारे वाहनों को किसी तरह पार्क करना पड़ता है। इससे कई बार जाम भी लग जाता है। अस्पताल की सड़क पर पर करीब आधा किलोमीटर तक सड़क के दोनों ओर निजी वाहन पार्क होते हैं।
अंतिम मरीज को देखने के बाद ही बंद होती है अस्पताल की ओपीडी : एमएस
चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर शर्मा ने माना कि मरीज अधिक होने से ओपीडी में नंबर देरी से आता है, लेकिन टोकन नंबर और पर्ची देखकर ही मरीजों का नंबर आता है। अंतिम मरीज को देखने के बाद ही चिकित्सक ओपीडी से उठते हैं। हालांकि समय 4 बजे तक का तय है। मरीज दूर-दूर से आते हैं, इसलिए सभी मरीजों को देखने और उपचार करने के बाद ही चिकित्सक उठते हैं, कभी 6 भी बज जाते हैं।