स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुर्वेद मंत्री विपिन सिंह परमार ने राज्य के सभी अस्पतालों के चिकित्सकों को आवश्यक रूप से जेनेरिक दवाइयां लिखने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखने से कहीं न कहीं गरीब लोगों के साथ अवश्य अन्याय होता है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी दिए गए लक्ष्यों को 31 मार्च तक हासिल करें। साथ ही आवंटित धनराशि का सौ फीसदी उपयोग करें।
परमार शिमला में वीरवार को राज्य के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और खंड चिकित्सा अधिकारियों के साथ राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के लिए हुई बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से सभी अस्पतालों में समय पर दवाइयां उपलब्ध करवाने को कहा। दवाइयों की समय-समय पर सैंपलिंग करने के भी निर्देश दिए।
कहा कि दवाओं की गुणवत्ता पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है और नमूने फेल होने पर दोषी कंपनियों के विरुद्ध सख्ती से निपटा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत दी जा रहीं विभिन्न सेवाओं का लाभ जनमानस तक पहुंचाने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डा. बलदेव ठाकुर व विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
अस्पतालों, शौचालयों के रखरखाव और सफाई पर ध्यान देने के निर्देश
मंत्री ने राज्य के सभी अस्पतालों, विशेषकर शौचालयों के रखरखाव तथा रसोईघर की सफाई की उचित व्यवस्था सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए। कहा कि अस्पतालों में लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं, इसलिए सफाई पर किसी प्रकार की शिकायत नहीं आनी चाहिए।
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निर्माणाधीन स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी निर्माण कार्यों की निजी तौर पर निगरानी करने तथा रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य संस्थानों के औचक निरीक्षण करने को कहा
परमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को जिले के स्वास्थ्य संस्थानों के औचक निरीक्षण करने तथा इनमें पाई जाने वाली कमियों के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मंत्री ने 108-एंबुलेंस और 102-एंबुलेंस सेवाओं के औचक निरीक्षण करने के लिए भी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए।
कहा कि 108-एंबुलेंस में आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां, ऑक्सीजन तथा अन्य उपकरणों की उपलब्धता होना अनिवार्य है। अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित बनाई जानी चाहिए और उपकरणों व मशीनरी को सही हालत में रखा जाना चाहिए।