स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश को 2023 से पूर्व टीबी मुक्त करने के लिए कमर कस ली है, जबकि भारत सरकार ने देश को टीबी मुक्त करवाने के लिए 2025 का लक्ष्य रखा है। उन्होंने प्रदेश में टीबी के मामलों का पता लगाने की दर और सफल उपचार दर के संबंध में आरएनटीसीपी कार्यक्रम से संतोष जताया।
उन्होंने व्यावसायिक घरानों से प्रदेश को काटरीज सहित सीबीएनएएटी मशीनें उपलब्ध करवाने की अपील की। कौल सिंह मंगलवार को प्रदेश में कार्यरत विभिन्न कॉरपोरेट घरानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कहा कि हिमाचल देश में एफडीसी और टीबी रोगियों के लिए दैनिक दवा और आहार कोटा देने वाला पहला राज्य बन गया है।
अभी तक 6000 टीबी रोगियों को दैनिक कोटे के तहत शामिल किया गया है। प्रदेश में एमडीआर-टीबी का पता लगाने के लिए नौ सीबीएनएएटी मशीनें उपलब्ध हैं। पालमपुर एवं नूरपुर सहित शेष जिलों किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू में दो माह में पांच और मशीनें स्थापित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिविल अस्पताल स्तर तक ऐसी और मशीनों की जरूरत है। ये मशीनें सरकाघाट, सुंदरनगर, पांवटा साहिब और नालागढ़ में प्राथमिकता के आधार पर स्थापित करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने हाल ही के विधानसभा सत्र में ‘मुख्यमंत्री क्षयरोग उन्मूलन योजना’ की घोषणा की थी। इसमें विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है।
टीबी नियंत्रण गतिविधियों में हिमाचल अग्रणी: सक्सेना
प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने कहा कि प्रदेश में एमडीआर-टीबी केंद्रों की संख्या बढ़ा दी गई है। टीबी नियंत्रण गतिविधियों में प्रदेश अग्रणी स्थान पर है। राज्य टीबी नियंत्रण अधिकारी डा. आरके बरिया ने मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
यूनियन की क्षेत्रीय निदेशक डा. जेमी टॉनसिंग ने भी संबोधित किया। यूएसएआईडी, सीटीडी और अन्य कारपोरेट घरानों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतियां और मूल्यवान सुझाव दिए। स्वास्थ्य निदेशक डा. बलदेव ठाकुर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज राय सहित अन्य गणमान्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे।