प्रदेश के कॉलेजाें में करीब 600 पद प्राध्यापकों के और 40 पद प्रिंसिपल के खाली हैं। कई कॉलजों में आवश्यक भवन और अन्य मूलभूत आधुनिक सुविधाओं की कमी है। उन्होंने बताया कि संगठन इसके विरोध में नहीं है, लेकिन इसे लागू करने से पहले कॉलजों में शिक्षकों, गैर शिक्षक कर्मचारियाें, भवन विस्तार और अन्य मूलभूत सुविधाएं दिया जाना बेहद जरूरी है। सरकार सिर्फ आनन-फानन में केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त करने की इच्छा से इसे जबरन लागू करवा रही है। जबकि एनईपी को लेकर प्रदेश विश्वविद्यालयों की ओर से अब तक न तो पाठ्यक्रम और न संबंधित पाठ्य पुस्तकों को उपलब्ध करवाया है। इसे लेकर न ही प्राध्यापकों को विधिवत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इस मौके पर एचजीसीटीए एकाई अध्यक्ष डॉ. सीमा, मीडिया प्रभारी डॉ. होशियार सिंह, पूर्व एचजीसीटीए प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश ठाकुर, डॉ. चमन प्रेमी व अन्य मौजूद रहे।
खत्म होंगे स्ट्रीम, आर्ट्स का विद्यार्थी साइंस का विषय पढ़ सकेगा
एचसीटीए ने बताया कि नई शिक्षा नीति के लागू होने से कॉलेजों में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस स्ट्रीम खत्म हो जाएंगे। आर्ट्स का विद्यार्थी सांइस का विषय भी पढ़ सकेगा। चार साल में ग्रेजुएट होगा। लेकिन प्रदेश के कई ऐसे कॉलेज हैं जहां आर्ट्स और साइंस में भी पढ़ाई हो रही है। ऐसे में वहां इसका विपरीत असर पड़ेगा।