हिमाचल की बीबीएमबी में हिस्सेदारी पर अपने बयान से हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर विवादों से घिर गए हैं। हिमाचल की ओर लगातार उठाए जा रहे इस मामले से खुद को खट्टर ने अनजान बताया है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए हिमाचल सरकार ने ये मामला कभी नहीं उठाया।
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जबकि शनिवार को हिमाचल सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब और हरियाणा बीबीएमबी में फुल बोर्ड मेंबर हैं। इस मामले को बोर्ड में अनेक बार रखा जा चुका है। इसे हाल ही में भी रखा जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट से इस पर हिमाचल के पक्ष में फैसला भी आ चुका है।
ऐसे में अगर हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने अपने सीएम को इस मामले से अनभिज्ञ रखा है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण श्रीधर ने भी कहा कि हरियाणा, पंजाब और बीबीएमबी के तमाम हिस्सेदारों को हिमाचल को करीब 4200 करोड़ रुपये का एरियर देना है। हरियाणा सरकार इससे अनजान हो ही नहीं सकती है।
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कब देंगे हिमाचल की हिस्सेदारी
हरियाणा और पंजाब बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी कब देंगे? इस सवाल पर शनिवार को शिमला के पीटरहॉफ में पत्रकार वार्ता में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि बीबीएमबी पर हिमाचल सरकार ने हरियाणा सरकार से कभी ऐसी बात नहीं की है।
उन्होंने कहा कि जबसे वे मुख्यमंत्री बने हैं, तबसे हिमाचल प्रदेश ने एक बार भी यह मामला उनके सामने नहीं लाया है। जहां तक उन्हें लगता है तो ये पैसा हरियाणा को नहीं, बल्कि पंजाब को ही हिमाचल को देना है। मालूम रहे कि सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीतने के बाद हिमाचल सरकार बेशक लंबे समय से पंजाब, हरियाणा सरकारों और अन्य
स्टेकहोल्डरों से बीबीएमबी का करीब 4200 करोड़ रुपये का एरियर का हिस्सा मांग रही है। पत्रकारों के इस सवाल पर खट्टर चौंक गए कि हरियाणा को हिमाचल सरकार को बीबीएमबी पर शेयर भी देना है। हालांकि, उन्होंने इतना जरूर कहा कि किसी भी सरकार का कोई हक है तो इसे उसे राज्य को दिया ही जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में हिमाचल के हक में दिया अहम फैसला
हिमाचल सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ साल 1996 में सुप्रीम कोर्ट में केस किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर 2011 को हिमाचल के हक में अहम फैसला देते हुए बीबीएमबी में बढ़ा हुआ हिस्सा साल 1966 से देने को कहा था। इस हिस्सेदारी के बदले हिमाचल सरकार ने 4249 करोड़ रुपये का एरियर क्लेम किया है।
हिमाचल सरकार विद्युत परियोजना में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाने की पैरवी भी कर रही है। इस मामले को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल दोनों की प्रदेश सरकारों ने कई बार केंद्र और पड़ोसी राज्यों की सरकारों के समक्ष उठाने के दावे किए हैं।
केंद्र मध्यस्थता करते हुए हिमाचल को महज 800 करोड़ रुपये दिलाने को तैयार है, जबकि हिमाचल सरकार का ये कहना है कि ये वर्ष 1953 से दिया जाना चाहिए। हिमाचल सरकार इसे बिजली के मार्केट रेट या अन्य तय मानकों पर मांग रहा है। ये मामला वर्तमान में फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।
रेल मार्ग बनाने में हरियाणा का कोई रोड़ा नहीं
चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन और अन्य रेल लाइनों को बनाने में हरियाणा सरकार का हिमाचल सरकार के लिए कोई रोड़ा नहीं है। पत्रकारों के एक अन्य सवाल पर खट्टर बोले कि हरियाणा अपने क्षेत्र में भू अधिग्रहण प्रक्रिया में कोई लेटलतीफी नहीं कर रही है।
एसवाईएल पर पंजाब को रॉयल्टी नहीं देगा हरियाणा: खट्टर
सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर पर फैसले से खुशी जताते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि इस बारे में पंजाब को किसी तरह की रॉयल्टी नहीं दी जाएगी और न ही ऐसी कोई बाध्यता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा को इसका हक मिला है। इसका लाभ हरियाणा में जनता के एक बहुत बड़े वर्ग को मिलेगा।
अभी भी बड़ी संख्या में लोग पेयजल सुविधा से वंचित हैं, उनके लिए ये बड़ी राहत होगी। मनोहर लाल खट्टर शिमला के राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। कहा कि हरियाणा सरकार किसी का पानी नहीं ले रही है। इस बारे में 1981 में अंतिम फैसला हो गया था। मामले को प्रधानमंत्री के ध्यान में भी लाया जा रहा है। खट्टर ने हरियाणा सरकार की कई उपलब्धियों को भी गिनाया। कहा कि हिमाचल सरकार इनसे सीख ले सकती है।
हरियाणा में कभी तहसीलदारों के कार्यालयों में जमीनों की रजिस्ट्रियां करवाने में गड़बड़ी होती थी और अब सारी प्रणाली ही पारदर्शी कर दी गई है। एक क्लिक पर हजारों शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। वहां शिक्षक स्थानांतरण की नई नीति बनी है। घरेलू और मिट्टी तेल में से कोई एक ही लाभ लिया जा सकता है। इस मौके पर शिमला के स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज, भाजपा नेता गणेश दत्त, अनिल भारद्वाज हैडली, करण नंदा, दीपक शर्मा, गौरव कश्यप आदि भी मौजूद रहे।
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि नोटबंदी का निर्णय लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन पर प्रहार किया है। इससे देश में शुचिता आएगी। विकास के काम अधिक होंगे। लंबे समय बाद इसका लाभ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले को तो विपक्ष भी सराह रहा है। खट्टर बोले- हरियाणा में 6 से 10 दिसंबर के बीच गीता जयंती मनाई जाएगी।
ये अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक आयोजन होगा। इसमें गीता के माध्यम से पूरी दुनिया में दिए गए संदेश को याद किया जाएगा। खट्टर ने शनिवार को शिमला में भाजपा नेताओं से नाभा का हालचाल भी पूछा। वे नगर निगम शिमला के चुनाव के समय नाभा में रात्रि ठहराव भी कर चुके थे।