कहलूर रियासत के समय बने पौराणिक मंदिरों का सर्वेक्षण 20 से अधिक टीमें करेंगी। भाषा एवं संस्कृति विभाग ने टीमों को पत्र लिखकर बिलासपुर आने के लिए कहा है। शनिवार को दिल्ली की टीम बिलासपुर पहुंची। आईटीआरएचडी (इंडियन ट्रस्ट फॉर रूलर हेरीटेज डेवलपमेंट) टीम ने गोबिंदसागर झील के किनारे सांडू मैदान में पहुंचकर मंदिरों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
शुरुआती चरण में मंदिरों पर बनी कलाकृति की जांच की। हर कलाकृति के फोटो लेकर उसकी ड्राइंग बनाने को फाइल तैयार की जा रही है। पांच सदस्यीय टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कई दशकों पहले मंदिरों में बनाई गई कलाकृति अभी तक दिखाई दे रही हैं। रंगनाथ मंदिर और गोपाल मंदिर में लगे पत्थरों की भी जांच की। भाषा एवं संस्कृति विभाग शिमला के इंजीनियर चुनी लाल कश्यप ने बताया कि मंदिरों के सर्वेक्षण को पहले भी केंद्र की एक टीम दौरा कर गई है।
किसी कारणवश यह कार्य सिरे नहीं चढ़ पाया। विभाग ने इस बार 20 से अधिक टीमों को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि यहां मंदिरों को स्थानांतरित करना मुश्किल कार्य है, क्योंकि साल के सिर्फ तीन से चार माह यह मंदिर पानी के बाहर रहते हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन अभी समय लगेगा। शनिवार को निरीक्षण टीम के साथ जिला भाषा अधिकारी बिलासपुर नीलम चंदेल भी मौजूद रहीं।