सीबीआई की अब तक की जांच की मानें तो आईजी व एसआईटी चीफ जहूर हैदर जैदी ने सूरज की हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की थी? सीबीआई ने उन पर धारा 201 के अलावा साजिश रचने की धारा 120 बी भी लगाई है।
सीबीआई सूत्रों का कहना है सूरज हत्याकांड को पुलिस कर्मियों ने ही अंजाम दिया और इस मामले की जांच को बनाई गई एसआईटी के प्रमुख जैदी ने न केवल असलियत को छिपाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि हत्या का इलजाम दूसरे आरोपी पर थोप दिया।
सीबीआई ने सूरज हत्याकांड मामले में गिरफ्तार सात अन्य के खिलाफ सीधी हत्या का आरोप लगाया है। सीबीआई की अब तक की जांच में जो बात सामने आई है उसमें डीएसपी ठियोग के अलावा छह अन्य पुलिस कर्मी हत्या के मामले में शामिल हैं।
सूत्र बताते हैं कि पुलिस कर्मियों और आरोपियों से कई घंटे की पूछताछ के बाद सीबीआई इस नतीजे पर पहुंची कि लॉकअप हत्याकाण्ड पुलिस वाले ही शामिल थे। इनका इरादा गुडिया रेप व हत्याकाण्ड की जांच की दिशा भटकाना था। सीबीआई ने फोन कॉल की डिटेल भी हासिल कर ली है। उसे कंप्यूटर रिकार्ड व सरकारी दस्तावेजों में भी छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं।
क्या है धारा 201 - अपराध के सबूत मिटाना या अपराधी को बचाने के लिए गलत इत्तला देना। यह जानते हुए भी कि अपराध हुआ है।
क्या है धारा 120 बी- हत्या, आजीवन कारावास या दो साल या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने के आपराधिक साजिश में शरीक होने पर यह धारा लगती है।
क्या है धारा 302
यह हत्या की धारा है। किसी व्यक्ति को जान से मार देने पर उसे 302 का मुजरिम माना जाता है।