मुख्य सचिव ने अदालत को बताया था कि नदियों के किनारों से खनन को पहले जमीन लीज पर दी जाती थी। अवैज्ञानिक तरीके से खनन होने लगा। इसे रोकने के लिए अब नीलामी के जरिए चिन्हित स्थान को खनन के लिए दिया जाता है।
इस प्रक्रिया के लिए लंबे समय की जरूरत होती है, क्योंकि केंद्र सरकार से स्वीकृति लेनी जरूरी है। खंडपीठ ने मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि वह अपने शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि नदियों के किनारों को खनन के लिए कितने जल्दी नीलाम किया जा सकता है ताकि अवैध खनन तो रुके साथ ही राज्य सरकार के खजाने में भी बढ़ोतरी हो।
एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश पारित किए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अवैध खनन के कारण ऊना स्थित गरनी खड्ड का पानी सूख रहा है। अपने पिछले आदेशों में हाईकोर्ट ने सचिव उद्योग को आदेश दिए दिए थे कि वे अदालत को बताएं कि प्रदेश भर में कितना क्षेत्र है, जिन नदियों से खनन किया जा सकता है