प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर पदोन्नति के पुराने नियमों को बदलाव किया है। नए नियमों में अब ग्रुप इंस्ट्रक्टर को प्रिंसिपल बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता में ढील दी गई है।
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इसके तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के प्रिंसिपल बनने के लिए अब क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग (सीटीआई) की आवश्यकता नहीं होगी।
जबकि इससे पहले मैट्रिक के साथ नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट, क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग और बतौर ग्रुप इंस्ट्रक्टर 6 साल का अनुभव अनिवार्य था या डिप्लोमा इंन इंजीनियरिंग के साथ तीन साल का अनुभव होना चाहिए था।
हिमाचल प्रदेश आईटीआई तकनीकि कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष यशपाल सिंह रायजादा ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने अपने लोगों के फायदा देने के लिए पद्दोनति नियमों में ढील दी गई है।
उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि शैक्षणिक और तकनीकि योग्यता अधिसूचना को तुरंत रद्द किया जाए और पुराने नियमों को ही पुन: लागू किया जाए।
उन्होंने बताया कि पुराने नियम प्रशिक्षण में गुणवत्ता को बनाए रखने और एनसीवीटी के तहत बनाए गए थे।
अब नए नियमों से उन ग्रुप इंस्ट्रक्टर को सीधा फायदा होगा जिन्होंने सेवाकाल के दौरान शैक्षणिक योग्यताओं को पूरा नहीं किया है। नए नियमों में आईटीआई के सीनियर स्केल प्रधानाचार्यों को भी सम्मिलित किया गया है।
संघ को नहीं लिया विश्वास में
हिमाचल प्रदेश आईटीआई तकनीकि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गुलाब सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार और विभाग ने संघ को विश्वास में लिए बिना नियमों को बदला है।
दो विभिन्न पदों और विभिन्न वेतनमान रखने वालों के लिए भर्ती एवं पद्दोनति नियम एक जैसे नहीं हो सकते हैं। पद्दोनति के लिए हमेशा भी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाई जाती है घटाई नहीं। नियमों में जानबूझ कई खामियां कर रखी गई है।