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राज्यपाल की शिक्षकों को नसीहत, राजनीति करना चाहते हैं तो दें इस्तीफा

Sat, 23 Jul 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि शिक्षक राजनीति करना चाहते हैं तो वे अपने पद से इस्तीफा दे दें। शिक्षक का कार्य सबसे पवित्र कार्य है। शिक्षक पर छात्र के जीवन को सुधारने से लेकर उसे आदर्श एवं संस्कारी व्यक्ति बनाने की जिम्मेदारी होती है।
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इसलिए इन्हें गंभीर होने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों को नसीहत दी कि वे राजनीति के क्षेत्र में न जाएं। इसका कीटाणु एक बार पनप गया तो वह वापस नहीं जा सकता। विवि के स्थापना दिवस को समारोह के रूप में मनाने का कोई लाभ नहीं है।

हमें एक परिवार की तरह संकल्प लेना चाहिए कि यहां सिर्फ पठन-पाठन होगा और राजनीति नहीं होगी। राज्यपाल एचपीयू के स्थापना दिवस समारोह में मुख्यातिथि थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश विवि अच्छा कार्य कर रहा है।
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आचार्य देवव्रत ने कहा कि शिक्षक मानव और राष्ट्र का निर्माण करता है। देश का विकास सड़कों, भवन निर्माण, उद्योगों और भौतिक आविष्कारों से नहीं होता। राष्ट्र निर्माण युवाओं के व्यक्तित्व विकास, चरित्रवान होने, जवानों के शौर्य, माताओं के सतीत्व और जितेंद्रीय मानवों से होता है।

वेदों में भी शिक्षक से बड़ा स्थान किसी का नहीं है। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि एक मां अपने बच्चे की देखरेख के मामले में किसी पर विश्वास नहीं करती। वह जब उसे स्कूल छोड़ने जाती है तो शिक्षक पर पूरा विश्वास करती है कि वह उसे अच्छा इंसान बनाएगा।

कहा कि युवा छात्र देश का भविष्य है। हमें, मैंने क्या लेना की सोच छोड़नी होगी। ऐसी अपने ऊपर केंद्रित सोच से मानव और पशु में कोई अंतर नहीं रह जाता। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। विवि के मौजूदा हालात को जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक चाहे तो बिगड़े हुए बच्चों को भी जिम्मेदार इंसान बना सकता है।

यदि उनके हाथ से होकर भी छात्र अपराधी बन जाता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? शिक्षक  उन्हें सुधारने का कार्य करे। कहा कि  उत्तरदायित्व का पालन हो तो इस विश्वविद्यालय को ए ग्रेड में लाया जा सकता है।
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