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सरकार की नीति से मजबूर हैं लाखों बागवान

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सेब सीजन में बागवान महंगे दामों पर घटिया कार्टन खरीदने को मजबूर हैं। गुम्मा कार्टन फैक्टरी बंद होने के कारण बाजार में कार्टन बनाने वाली प्राइवेट कंपनियों का एकाधिकार हो गया है।
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निजी कंपनियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है, इस कारण बाजार में मनमानी दरों पर कार्टन बेचा जा रहा है। कार्टन की क्वालिटी अच्छी न होने के कारण बागवान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।

मंडियों तक पहुंचने से पहले ही सेब खराब हो रहा है। बारदाना कमजोर होने के नाम पर खरीददार सेब की प्रति पेटी कीमत 50 से 80 रुपये तक कम लगा रहे हैं। गुम्मा कार्टन फैक्टरी बंद होने के बाद से बाजार में कार्टन की कीमतें अनियंत्रित हैं।
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सेब उत्पादक क्षेत्रों में अधिकतर कार्टन बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पंजाब और हरियाणा में लगी फैक्टरी से पहुंच रहा है। करीब एक दर्जन कंपनियां सेब उत्पादक क्षेत्रों में कार्टन सप्लाई कर रही हैं।

हर वर्ष बढ़ रहे हैं कार्टन के दाम

दो साल पहले बाजार में जिस कार्टन की कीमत 30 रुपये थी, अब बढ़ कर 40 से 50 रुपये हो गई है। सालाना कार्टन की कीमतों में सात से दस रुपये तक बढ़ोतरी हो रही है। इस समय बाजार में 42 से लेकर 55 रुपये तक कार्टन मौजूद है।

कोटखाई के समीप गुम्मा में खोली गई कार्टन फैक्टरी के स्थान पर इंजीनियरिंग कॉलेज चल रहा है। 1989 में गुम्मा कार्टन फैक्टरी स्थापित की गई थी। फैक्टरी लगाने में आरंभिक लागत करीब 30 करोड़ रुपये आई थी। फैक्टरी के लिए जापान और इंग्लैंड से मशीनें मंगवाई गई थी।

प्रदेश सरकार ने सेब की साढ़े 22 किलो की पैकिंग तो अनिवार्य कर दी, लेकिन बागवानों को इसके लिए पेटियां उपलब्ध नहीं करवाई गई। गुम्मा कार्टन फैक्टरी यदि बंद न होती तो सरकार यहां साढ़े 22 किलो की पेटियां बना कर बागवानों को उपलब्ध करवा सकती थी।
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सरकार और विभाग कर रहे अनदेखी

बागवानी के क्षेत्र में छह राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त कर चुके रामलाल चौहान का कहना है कि प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग बागवानों की अनदेखी कर रहे हैं। हिमाचल में उद्योगों को बढ़ावा देने का दंभ तो भरा जा रहा है, लेकिन बागवानी क्षेत्र की ओर किसी का ध्यान नहीं है।

गुम्मा कार्टन फैक्टरी बनने से बहुमूल्य वन संपदा का संरक्षण हुआ था, लेकिन फैक्टरी बंद हो गई। सरकार सेब की पैकिंग 22 किलो की पेटी में करने का अध्यादेश तो लाई, लेकिन बागवानों को छोटी पेटी उपलब्ध हो इसका इंतजाम नहीं किया गया। गुम्मा कार्टन फैक्टरी बंद न होती तो बागवानों को कार्टन संबंधी दिक्कतें न झेलनी पड़ती।
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