हिमाचल विधानसभा में राज्य गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। जीएसटी के लिए बुलाए विशेष सत्र के दूसरे दिन शनिवार को विधेयक पर करीब एक घंटे तक चर्चा हुई और इसके बाद ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया गया। केंद्र के जीएसटी विधेयक को हिमाचल में भी उसी स्वरूप में पास किया गया।
इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक जुलाई से देशभर में जीएसटी लागू होने से समान कर प्रणाली होगी। इससे हिमाचल में एक दर्जन से अधिक टैक्स समाप्त हो जाएंगे। विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य गुड्स एंड सर्विस टैक्स को सदन के पटल पर रखा।
मुख्यमंत्री ने जीएसटी के फायदे और विशेषताएं गिनाईं। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, सुरेश भारद्वाज, जीएस बाली, विद्या स्टोक्स, रविंद्र सिंह रवि और कुलदीप कुमार ने चर्चा में अपनी-अपनी बात रखी। ध्वनि मत से विधेयक पारित होने के बाद स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
जीएसटी लागू होने पर भी प्रभावी रहेंगे चार टैक्स
एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बावजूद हिमाचल सरकार के चार टैक्स प्रभावी रहेंगे। ये जीएसटी के दायरे से बाहर रहेंगे। अतिरिक्त वस्तु कर, सीजीसीआर, यात्री वस्तु कर और टोल टैक्स की दरें प्रदेश सरकार खुद तय करेगी। भले ही देश भर में समान टैक्स प्रणाली होने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने जा रही है।
रोजमर्रा की कई वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगेगा, लेकिन राज्य सरकार चार तरह के पुराने टैक्स फिर भी लागू कर सकती है। इसके अलावा केंद्र ने पेट्रोलियम पदार्थों और शराब को भी जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है। इन पर हिमाचल सरकार खुद टैक्स लगा सकेगी।
आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने बताया कि पेट्रोलियम पदार्थों में क्रूड ऑयल, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी, एविएशन टरबाइन ऑयल आदि शामिल हैं। प्रधान सचिव आबकारी एवं कराधान ओंकार शर्मा ने कहा कि चूंकि इन पर लगने वाले वैट को जीएसटी में ही शामिल किया गया है, इसलिए अब प्रदेश सरकार जल्द ये फैसला करेगी कि किस तरह का टैक्स लगाया जाए।
एक जुलाई से ये कर होंगे समाप्त
- वैट और सेल्स टैक्स
- मनोरंजन कर
- केंद्रीय सेल्स टैक्स
- खरीद शुल्क
- लग्जरी टैक्स
- स्टेट सेस व सरचार्ज
- सर्विस टैक्स
- लॉटरी, जुआ व सट्टेबाजी कर
- सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी
- स्पेशल ड्यूटी कस्टम
- सेंट्रल सरचार्ज व सेस
साल 2006 में पी. चिदंबरम ने रखा था जीएसटी प्रस्ताव: सीएम
विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन सदन के नेता वीरभद्र सिंह ने एसजीएसटी सदन पटल पर रखते हुए कहा कि अप्रत्यक्ष करों में सुधार की प्रक्रिया अस्सी के दशक में शुरू हुई थी। वर्ष 1991 में राजा चैल्लिया कमेटी कर सुधार को लेकर बनी। इसके बाद वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) आया।
एक अप्रैल 2005 को वैट लागू हुआ, लेकिन उससे पहले वर्ष 2003 में केलकर कमेटी के जीएसटी की सिफारिश की थी। 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जीसीटी का प्रस्ताव रखा। लंबे समय तक इससे पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करने के बाद वर्ष 2010-11 के बजट भाषण में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने जीएसटी की बात कही।
संविधान संशोधन के बाद 22 मार्च 2011 को जीएसटी बिल लोकसभा के पटल पर रखा गया। बिल पारित नहीं होने पर मामला संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास गया। इसके बाद पिछले वर्ष कांग्रेस के कुछ सुझावों के बाद सभी दलों की सहमति से केंद्र सरकार ने इसे पारित किया।
जीएसटी के फायदे
एकल कर प्रणाली से पूरे देश में एक समान बाजार मिलेगा
उद्योगों के लिए बेहतर पूंजी प्रबंधन के अवसर मिलेंगे
माल एवं सेवाओं के दाम घटेंगे
राजस्व में वृद्धि होगा, देय करों को सही इस्तेमाल होगा
ईज ऑफ बिजेनस सूचकांक में देश की रैंकिंग सुधरेगी
देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 1.5 से 2 प्रतिशत बढ़ेगा
अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में और पारदर्शिता आएगी
जीएसटी की मुख्य विशेषताएं
हिमाचल प्रदेश में 10 लाख तक आय वाले करदाताओं को छूट
50 लाख तक की आय वाले करदाताओं से रचनात्मक उगाही
तीन दिन के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा रहेगी
कर प्रणाली बेचे जाने वाले माल और सेवाओं पर प्रभावी होगी
जीएसटी और एसजीएसटी में कर उगाही का एक समान कर आधार रहेगा
बाली भटके, सुजान की सलाह पर धूमल भड़के
विधानसभा में जीएसटी बिल पर जब मंत्री जीएस बाली चर्चा में हिस्सा ले रहे थे तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों में हल्की नोंकझोंक हुई। दरअसल बीच में मंत्री जीएस बाली बोलते-बोलते भटक गए।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने बाली की गलती पर बोलने पर लिए हाथ खड़ा किया तो मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने उन्हें टोकते हुए प्यार से बोलने की सलाह दे डाली। पठानिया की सलाह पर धूमल भड़क गए। धूमल बोले पठानिया जी आपको पता नहीं लगे तो मत बोला करिये।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री जीएस बाली जब जीएसटी विधेयक पर बोल रहे थे तो वे बोलते हुए बीच में भटक गए। जीएस बाली ने कहा - इस महत्वपूर्ण रिफ ॉर्म मेें आज इतिहास का एक नया दौर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए शुरू हुआ। पूरे देश में यह एक बड़ा रिफॉर्म है।
इसके लिए जब राहुल गांधी के साथ के डा. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे, उस समय काम शुरू हुआ। इस बीच विपक्ष के सदस्यों की ओर से विरोध किया गया कि वे गलत बोल रहे हैं। इस पर बाली बोले- स्लिप ऑफ टंग अब मैंने ठीक कर लिया। इस पर नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने भी बोलने के लिए अपना हाथ खड़ा कर दिया।
स्पीकर बुटेल बोले - प्रो. प्रेमकुमार धूमल जी! आप कुछ बोलना चाहते हैं। इसी बीच ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा - धूमल जी! आप थोड़ा प्यार से बोलें, हमें भी बोलना है। इस पर धूमल भड़क गए। धूमल बोले - अगर आपको समझ न आए तो मत बोला करिए।
अध्यक्ष महोदय! डा. मनमोहन सिंह वर्ष 1990 में राज्यसभा में आए, राहुल गांधी जी राजनीति में कहीं नहीं थे। स्वर्गीय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी ने उनको मंत्री बनाया था। बाली बोले : मैंने रिफार्म्स की बात की है।
धूमल साहब! शांता और नड्डा को प्रदेश हित की बात करनी चाहिए
चर्चा में भाग लेते हुए बाली बोले- जीएसटी के लिए प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और आपकी पार्टी भी बधाई की पात्र है, लेकिन इसके साथ-साथ आप यह नहीं भूलें कि यह संभव नहीं था, अगर कांग्रेस पार्टी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, विपक्ष के नेता और इसके अलावा जो सारी पार्टियां हैं उनका सहयोग या सहयोगी रवैया नहीं होता।
ऐसी स्थिति में ये बिल इतिहास के पन्नों में नहीं आता। अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेना आप भूल गए। उन्होंने भी इसके लिए प्रयास किए। छोटे-छोटे होटलों पर इस पर्यटन राज्य में टैक्स का लोड पड़ेगा। हमें दिल्ली जाकर अपनी स्पेशल स्टेट की बात करनी चाहिए।
धूमल ने कहा - इसके लिए सरकार को वहां बुलाया गया था, आप वहां क्यों नहीं बोले। जवाब में बाली बोले - धूमल साहब! आपके भी वहां सांसद बैठे हैं। जिनमें शांता कुमार हैं और जगत प्रकाश नड्डा है, उनको भी वहां प्रदेश हित की बात करनी चाहिए। इस पर धूमल शांत रहे।