आईजीएमसी समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं देने वाले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट को भी स्टाइपेंड देने की मांग की है। कमेटी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष यह मांग रखी।
मेडी-लीडर्स की राज्य कार्यकारी कमेटी ने आईजीएमसी समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं देने वाले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट को भी स्टाइपेंड देने की मांग की है। कमेटी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष यह मांग रखी। कमेटी के प्रतिनिधि ओकओवर में मुख्यमंत्री से मिले। मुख्यमंत्री ने बजट में इस मामले पर अंतिम फैसला लेने की बात कही। हिमाचल के कई ऐसे छात्र हैं जोकि विदेश के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री करके आते हैं। इसके बाद वह सरकारी संस्थानों में अपनी सेवाएं देते हैं तो उन्हें अन्य ग्रेजुएट की तरह स्टाइपेंड नहीं मिलता है।
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इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) समेत टांडा में करीब 50 ऐसे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट हैं। यह भी अन्य की तरह विभिन्न विभागों में 24 घंटे सातों दिन सेवाएं देते हैं। मेडी-लीडर्स के प्रदेश संयोजक एवं आईजीएमसी के डॉ. शिखिन सोनी की अगुवाई में कमेटी ने यह मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। इस अवसर पर एमबीबीएस श्रेणी से प्रेस एंड मीडिया के राज्य प्रभारी डॉ. पीयूष ठाकुर, राज्य प्रभारी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट डॉ. दिव्या कपूर, सोशल मीडिया एवं आईटी की प्रदेश सह प्रभारी डाॅ. अंकिता शर्मा, बीडीएस से आर्यन रांगड़ा मौजूद रहे।