गिरिपार (सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) में युवाओं के साथ युवतियां भी सेना में भर्ती होने के लिए बेताब हैं। गिरिपार के शिल्ला, डाबरा, बोकाला, टिटियाना, आंजभोज आदि गांव-उपगांव में दर्जनों युवक-युवतियां प्रचंड गर्मी के बीच सेना में भर्ती होने के लिए पसीना बहा रहे हैं। युवतियों का जज्बा लोगों में चर्चा और युवा वर्ग के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। सड़क, घासनियों और अस्पताल के प्रांगण में युवक और युवतियां कई दिनों से इसका प्रशिक्षण ले रही हैं।
प्रचंड गर्मी में जब कोई घरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं रहता तो यह युवा सड़कों पर पसीना बहा रहे होते हैं। अकेले शिल्ला गांव की करीब डेढ़ से दो दर्जन युवतियां शिवानी, तनवी, नेहा, तनु, शालिनी, रितिक, इंका, अलिशा, सचिन, प्रवेश, अमित, रितेश, पंकज, किशव, दिनेश, पवन, सचिन, रजत, निकेश, नितिन, अतुल, निहाल, राज प्रंशु, जयंत आदि तपती धूप में सेना भर्ती के लिए पसीना बहा रही हैं। रोज 6 घंटों के कड़े प्रशिक्षण में शरीर को पका रहीं हैं। इन जांबाजों को पंजाब रेजिमेंट से एसीपी हवलदार पद से रिटायर्ड पूर्व सैनिक कर्म सिंह प्रशिक्षण दे रहे हैं।
कर्म सिंह इन्हें न सिर्फ सेना में भर्ती की तैयारी करवा रहे हैं, बल्कि सेना की ट्रेनिंग के लिए कड़ा प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। शिल्ला गांव की लड़कियों का सेना में भर्ती होने का जज्बा और तैयारियां देख कर हर कोई हतप्रभ है। कर्म सिंह ने बताया कि ग्रामीण परिवेश में हालात प्रशिक्षण के अनुकूल नहीं है। गांव में न खेल मैदान है और न कोई व्यायाम शाला। यहां युवाओं के पास अगर कुछ है तो देश सेवा का जज्बा और इसके लिए कुछ भी कर गुजरने का हौसला। इसी जज्बे को ताकत बनाकर यह नौजवान सड़क, घासनियों और अस्पताल के बरामदों में कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं।