हिमाचल के सिरमौर जिले के पांवटा उपमंडल के अंतर्गत बनौर पंचायत के खतवाड़ गांव के मकानों में आई दरारों की वजह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। को उद्योग विभाग के ज्योलॉजिकल विंग की एक टीम गांव के निरीक्षण के लिए पहुंची। गांव के घरों और जमीन का निरीक्षण कर टीम ने मिट्टी के कुछ सैंपल भी भरे हैं।
प्रारंभिक जांच में भू-गर्वीय वैज्ञानिक जमीन धंसने की वजह जमीन की ऊपरी परत का खिसकना या धंसना मान रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे क्रीप मूवमेंट कहते हैं। गौरतलब है कि गांव की जमीन धंस रही है। इस वजह से लगभग 18 घरों में दरारें आ गई हैं। इनमें से कई तहस-नहस भी हुए हैं। ‘अमर उजाला’ ने 19 जनवरी के अंक में ‘भूस्खलन से धंसा खतवाड़ गांव...’ शीर्षक के साथ यह मामला प्रमुखता से उठाया था।
इस पर कड़ा संज्ञान लिया गया है। उद्योग विभाग के स्टेट ज्योलॉजिस्ट के आदेश पर विभाग की एक टीम जमीन धंसने के कारणों को जानने के लिए आज खतवाड़ पहुंची, जहां वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी और मकानों में आई दरारों की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि गांव की जमीन में क्रीप मूवमेंट हो रही है, यानी जमीन की ऊपरी परत धीरे-धीरे खिसक रही है।