युवाओं को प्रशिक्षित कर नौकरी और स्वरोजगार के लिए तैयार करने की सरकार की योजना जिला शिमला में ठप हो गई है। एक साल से इस योजना के लिए सरकार ने बजट नहीं दिया है। ऐसे में नौकरी तो दूर, प्रशिक्षण तक के लिए जिला प्रशासन के पास पैसा नहीं बचा है।
हालत यह है कि अब युवाओं का प्रशिक्षण तक नहीं करवाया जा रहा है। जिलाभर के युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जिला कल्याण विभाग की ओर से युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जाता है। विभाग के अनुसार साल में दो बार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। इसमें आरक्षित वर्ग के युवाओं के अलावा बीपीएल, एकल महिला और अन्य वर्गों के युवा भी प्रशिक्षण लेते हैं। छह माह तक युवाओं को नाइलेट या सीडेक के माध्यम से कंप्यूटर समेत अन्य तकनीकी कोर्स करवाए जाते हैं। विभाग के अनुसार एक बैच में सौ से ज्यादा युवा भी शामिल हो सकते हैं। इनकी संख्या आवेदन की अंतिम तिथि पर निर्भर करती है। प्रशिक्षण के दौरान भी युवाओं को भत्ता जारी किया जाता है।
नामी एजेंसियों से प्रशिक्षण लेने के बाद युवाओं को सरकारी महकमों में इंटर्नशिप करवाई जाती है। इसका कार्यकाल भी छह माह रहता है। इस दौरान भी सरकार की ओर से प्रतिमाह 1500 रुपये मानदेय जारी होता है। सरकार से अब जिला शिमला को एक साल से इस योजना के लिए कोई बजट नहीं मिला है। इसके चलते प्रशिक्षण करवाने तक का काम ठप हो गया है। युवा तहसील कार्यालय समेत जिला कल्याण अधिकारी के दफ्तर में पहुंच रहे हैं। जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने बताया कि युवाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी यह प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है।