अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने लोअर कोर्ट का फैसला रखा बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सेब की खरीद के बदले दिए गए चेक के बाउंस होने के मामले में अदालत ने दोषी फल कारोबारी की सजा और मुआवजे के फैसले को बरकरार रखा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने दोषी की ओर से दायर अपील खारिज करते हुए उसे छह माह के साधारण कारावास और 7.50 लाख रुपये के मुआवजे की सजा को सही ठहराया है। अदालत ने दोषी को तुरंत ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
चौपाल निवासी शिकायतकर्ता हेतराम सागर सेब बागवान हैं। वहीं चौपाल निवासी दोषी प्रकाश चौहान फल कारोबार से जुड़ा है। सितंबर 2019 में दोषी ने शिकायतकर्ता से 5,02,261 रुपये का सेब खरीदा था। देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने पीएनबी और एसबीआई के पांच चेक शिकायतकर्ता को जारी किए थे। बागवान ने चेकों को बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद नियमानुसार कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने जुलाई 2025 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह की कैद और 7.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ दोषी प्रकाश चौहान ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील में दलील दी थी कि चेक केवल सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर दिए थे और वह पहले ही भुगतान कर चुका है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए आरोपी की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं होता है तो सुरक्षा के लिए दिया चेक भी भुनाने योग्य हो जाता है और उसके बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है। अदालत ने यह भी कहा कि लगभग छह साल तक चले इस मामले में 7.50 लाख रुपये का मुआवजा पूरी तरह न्यायसंगत है।