सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के लड़कों को भी निशुल्क स्मार्ट वर्दी मिलेगी। शुक्रवार को धर्मशाला से दिल्ली होते हुए शिमला तक करीब एक हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर सचिवालय पहुंचे देवभूमि सवर्ण संगठन को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह आश्वासन दिया।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के लड़कों को भी निशुल्क स्मार्ट वर्दी मिलेगी। शुक्रवार को धर्मशाला से दिल्ली होते हुए शिमला तक करीब एक हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर सचिवालय पहुंचे देवभूमि सवर्ण संगठन को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक-दो दिन के भीतर इस बाबत निर्देश जारी हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने एक वर्ष के भीतर सवर्ण आयोग को गठित करने का वादा भी किया।
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देवभूमि सवर्ण संगठन के अध्यक्ष मदन ठाकुर ने बताया कि शुक्रवार देर शाम को मुख्यमंत्री से संगठन के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई। इस दौरान सामान्य वर्ग के लड़कों को निशुल्क स्मार्ट वर्दी योजना से बाहर करने का विरोध दर्ज कराया गया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को निशुल्क वर्दी दी जाएगी। किसी विशेष वर्ग के बच्चों को वर्दी योजना से बाहर नहीं किया जाएगा। मदन ठाकुर ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। मदन ठाकुर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक वर्ष के भीतर प्रदेश में सवर्ण आयोग गठित करने का आश्वासन दिया है।
उधर, सवर्ण आयोग गठित करने की मांग को लेकर देवभूमि सवर्ण संगठन ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय के समीप छोटा शिमला बस स्टॉप पर प्रदर्शन किया। पुराने बस अड्डे से पैदल रैली निकाल कर संगठन के सदस्य सचिवालय तक पहुंचे। संगठन के अध्यक्ष मदन ठाकुर ने सवर्ण आयोग गठित करने की मांग करते हुए सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के लड़कों को निशुल्क स्मार्ट वर्दी योजना से बाहर करने का विरोध किया। मदन ठाकुर ने कहा कि सरकार के इस फैसले से स्कूल स्तर पर ही समाज को बांटने का प्रयास किया गया है। इस स्तर पर बच्चों को जातीय आधार पर बांटना ठीक नहीं है।
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उन्होंने बताया कि फरवरी में उन्होंने सवर्ण आयोग गठित करने की मांग को लेकर धर्मशाला से पैदल मार्च शुरू किया था। दिल्ली होते हुए पैदल मार्च शुक्रवार को शिमला पहुंचा। दिल्ली में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपे गए। शुक्रवार को मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर सवर्ण आयोग गठित करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। गरीब लोगों को आरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस संगठन का राजनीतिकरण नहीं होने दिया जाएगा। बीते वर्ष जिस संगठन के बैनर तले उन्होंने मोर्चा खोला था, उस संगठन के कुछ पदाधिकारी राजनीति में प्रवेश कर गए हैं। इस कारण उन्होंने समाज के हित में नया संगठन खड़ा किया है।