अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
कैथलीघाट-ढली फोरलेन निर्माण प्रोजेक्ट :
टनल की एलाइनमेंट में आने वाले 500 मकानों का होगा बिल्डिंग कंडीशन सर्वे, भवनों की होगी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी
दरारों वाले घरों के साथ-साथ कमजोर भवनों की मरम्मत करवाएगा एनएचएआई
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में ढली-कैथलीघाट फोरलेन के तहत चमियाना-भट्ठाकुफर-चलौंठी ट्वीन टनल निर्माण से मकानों में दरारें आने और विरोध के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भवनों का सर्वेक्षण करवाने का फैसला लिया है।
एनएचएआई के अनुसार टनल की जद में आने वाले करीब 500 मकानों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे किया जाएगा। करीब 100 मीटर क्षेत्र में बनने वाली इन टनल के ऊपर बने सभी मकानों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जाएगी। भट्ठाकुफर से चलौंठी तक के एलाइनमेंट में आने वाले सभी करीब 500 मकान इस सर्वे में शामिल होंगे। सर्वे के बाद जिन भवनों की हालत खराब मिलेगी, उनकी एनएचएआई मरम्मत करवाएगा, ताकि टनल निर्माण कार्य शुरू होने पर भवनों को कोई खतरा न हो और भवन मालिकों को नुकसान से बचाया जा सके।
शांति विहार और भट्ठाकुफर क्षेत्र के जिन भवन मालिकों के मकानों में दरारें आ चुकी हैं, वे निर्माण कार्य को हमेशा के लिए बंद करने और पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस विवाद के बाद एनएचएआई ने भवन मालिकों को पूरी तरह विश्वास में लेने और उनकी संतुष्टि के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। शांति विहार में 10 मकानों में दरारें आने के बाद ट्वीन टनल निर्माण कार्य बंद कर दिया गया है। एनएचएआई भवन मालिकों के गुस्से को शांत करने और प्रोजेक्ट की समस्या का हल निकालने के लिए हरसंभव सहयोग कर रहा है।
भट्ठाकुफर से चलौंठी तक 2.712 किलोमीटर टनल का निर्माण
शिमला में भट्ठाकुफर से चलौंठी तक फोरलेन की करीब 2.712 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से करीब 700 मीटर टनल का काम पूरा हो चुका है। इन समानांतर टनल के ऊपर भट्ठाकुफर से लेकर संजौली के शांति विहार और चलौंठी तक करीब 500 मकान बने हैं, जिनमें हजारों परिवार रहते हैं। कुछ मकानों में दरारें आने के बाद क्षेत्र के निवासियों की चिंता बढ़ गई है और वे अपनी संपत्ति बचाने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
कोट्स
भवन मालिकों की सहमति और विश्वास के साथ आगे बढ़ेगा निर्माण
संजौली के शांति विहार क्षेत्र में कुछ भवनों में आई दरारों के असल कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी की टीम जांच कर रही है। भट्ठाकुफर से चलौंठी तक के रुके हुए निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करने से पहले एलाइनमेंट में आ रहे सभी भवनों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे करवाया जाएगा। हर मकान की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उसका रिकॉर्ड रखने के लिए फोटोग्राफी की जाएगी। जिन भवनों में दरारें आई हैं, उनका रेस्टोरेशन किया जाएगा और कमजोर भवनों को मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में भवन मालिकों को कोई नुकसान या परेशानी न हो और फोरलेन का निर्माण बिना रुकावट जारी रह सके। लोगों का विश्वास बनाकर और उन्हें संतुष्ट करने के बाद ही टनल का निर्माण किया जाएगा।
-आनंद दहिया, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, परवाणू-शिमला फोरलेन