गोरक्षा के लिए आयोग गठन और उसे राष्ट्रमाता का दर्जा देकर भाजपा सरकार अपने हाईकमान को संदेश देना चाहती है कि वह गाय की रक्षा कर रही है। हर्षवर्धन ने कहा कि इस आयोग के गठन से सरकार एक सफेद हाथी खड़ा कर रही है।
शिमला में आयोग के दफ्तर से हिमाचल के गोसदनों की निगरानी कैसे होगी। विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि पशु अस्पतालों में डॉक्टरों को बैठने की जगह तो है नहीं, ऐसे में गाय के संरक्षण के लिए आयोग का गठन समझ से परे है।
स्कूलों की हालत खस्ता है लेकिन कई गोसदनों के भवन आलीशान तरीके से बनाए गए हैं। 50 हजार के कर्ज में डूबी सरकार को आयोग के गठन की नहीं बल्कि विभाग को सशक्त करने की जरूरत है। विधायक राकेश पठानिया ने कहा कि विधेयक अच्छा है।
लेकिन, इसमें बनाई गई कमेटी में विषय के विशेषज्ञों लोगों को शामिल किया जाना चाहिए था। चेयरमैन और वाइस चेयरमैन विशेषज्ञ लोग बनाए जाएं। विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि इस बिल में कई प्रावधान सही नहीं है।
चेयरमैन और वाइस चेयरमैन बनाने का संदेश गलत जाएगा। पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि अभी तो यह शुरूआत है। कोर्ट ने हर पंचायत में गोसदन बनाने के लिए कहा था। ऐसा संभव नहीं है। इसलिए, इस आयोग के गठन से गाय संरक्षित होगी।