गुड़िया केस से सबक लेते हुए हिमाचल प्रदेश का फोरेंसिक साइंस निदेशालय खुद को हाईटेक बनाने में जुट गया है। फोरेंसिक साइंस निदेशालय ने राज्य पुलिस मुख्यालय में एक पोलीग्राफ मशीन अपने पास हस्तांतरित करवा दी है।
कइस निदेशालय के तहत फोरेंसिक साइकोलॉजी निदेशालय खोलने की पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। इस डिवीजन के तहत तीन और पदों को भी स्वीकृत किया जा रहा है। इन पदों पर आरएंडपी नियमों को बनाने के बाद ही भर्ती होगी और उसके बाद ये तमाम टेस्ट शुरू करवा दिए जाएंगे।
ये टेस्ट हिमाचल पुलिस के पास दर्ज मामलों के लिए करवाए जाएंगे। वर्तमान में नई दिल्ली या अहमदाबाद जाकर इन्हें करवाना पड़ता है। गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में सीबीआई ने आरोपियों के नार्को, ब्रेन मैपिंग जैसे टेस्ट करवाए।