हिमाचल के छोटे-बड़े लाखों कारोबारियों को चार अगस्त तक फूड लाइसेंस बनाने होंगे। पंजीकरण भी इसी तिथि तक करवाना होगा। इसके बाद कारोबारियों पर शिकंजा कसा जाएगा। प्रदेश में करीब तीन लाख फूड बिजनेस ऑपरेटर हैं।
इनमें बड़े होटल व्यवसायियों से लेकर छोटे दुकानदार भी शामिल हैं। अभी तक सूबे के करीब 80 हजार फूड बिजनेस ऑपरेटरों ने ही पंजीकरण करवाया है। जबकि करीब सात हजार कारोबारियों ने फूड लाइसेंस बनाया है।
फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड एक्ट पांच अगस्त 2011 को लागू किया गया था। 12 लाख रुपये से अधिक टर्न ओवर वाले कारोबारियों को फूड लाइसेंस और जबकि इससे कम टर्न ओवर पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
एफएसएसए के प्रावधानों के अनुसार बिना लाइसेंस कारोबार करने पर कोर्ट से छह की माह की कैद तथा पांच लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। जबकि पंजीकरण न करवाने पर दो लाख रुपये तक सजा हो सकती है। वहीं, तय तिथि के बाद आवेदन करने पर कारोबारी को प्रतिदिन के हिसाब से 100 रुपये जुर्माना भरना होगा।
फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड की ओर से पंजीकरण तथा लाइसेंस के लिए चार अगस्त की तिथि तय की गई है। इसके बाद बिना पंजीकरण या लाइसेंस कारोबार करने पर सख्ती से निपटा जाएगा। मनजीत सिंह, डेजिनेटिड ऑफिसर मंडी।
अधिकतर कारोबारियों ने नहीं करवाया पंजीकरण- सूबे के अधिकतर कारोबारियों ने फूड लाइसेंस नहीं बनाए हैं और न ही पंजीकरण करवाया है। इन्हें चार अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद विभाग की ओर से शिकंजा कसा जाएगा।