पुलिस की नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बावजूद चिट्टे का नशा युवाओं की जिंदगी को लील रहा है। आईजीएमसी में पिछले दो महीने के भीतर करीब पांच युवकों की चिट्टे की ओवरडोज से मौत के मामले सामने आए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रारंभिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि युवकों की मौत की वजह नशे का सेवन रहा है।
यह मामले शिमला जिला समेत आसपास के जिलों से आए थे। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने इन मामलों के सैंपल आगामी जांच के एफएसएल जुन्गा भेज दिए हैं। मृतकों में ज्यादातर टैक्सी चालक बताए जा रहे हैं। पिछले साल भी शहर में नशे से ओवरडोज के कई मामले सामने आए हैं। इसमें कई मामलों में पुलिस ने गैर ईरादतन हत्या के मामले भी दर्ज किए थे। इसके बावजूद जिले में नशे से ओवरडोज से मौत के मामले नहीं थम रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में नशे का बढ़ता जाल अब गंभीर सामाजिक और कानून व्यवस्था की चुनौती बन चुका है। प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में 66 लोगों की नशे की ओवरडोज से मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इसमें वर्ष 2023 में 8, 2024 में 31 और 2025 में 27 मौतें दर्ज की गईं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्ष 2024 में ओवरडोज से मौतों में कई गुणा इजाफा हुआ है।
चिंता की बात यह है पुलिस की नशा माफिया पर कड़ी कार्रवाई के बावजूद नशे की वजह से युवाओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ज्यादातर मामलों में आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि इसलिए भी नहीं हो पाती है क्योंकि लोकलाज के कारण परिजन इस बारे में पुलिस को सूचना देते ही नहीं हैं और अस्पताल भी नहीं पहुंचते। यही वजह है कि सरकार और पुलिस के पास नशे की ओवरडोज से होने वाली मौत के मामलों का सही आंकड़ा नहीं मिल पाता है।