कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिभा सिंह के बेटे एवं विधायक विक्रमादित्य सिंह के विस क्षेत्र शिमला ग्रामीण से टिकट के लिए पांच आवेदन आए हैं। इससे सियासी माहौल गरमा गया है। वीरभद्र परिवार का यहां अच्छा खासा दबदबा माना जाता है लेकिन आवेदन के अंतिम दिन पांच दावेदारों के सामने आने से सियासी गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। आवेदन करने वालों में पूर्व ब्लॉक समिति अध्यक्ष प्रदीप वर्मा उर्फ बबली, जिला परिषद सदस्य चुन्नी लाल गर्ग, प्रदीप वर्मा (वकील), हरिकृष्ण हिमराल और कपिल शर्मा शामिल हैं। शिमला ग्रामीण से पहली बार चुनाव जीत कर विक्रमादित्य सिंह विधानसभा पहुंचे हैं।
इनसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री एवं इनके पिता दिवंगत वीरभद्र सिंह इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह ने यह सीट अपने बेटे विक्रमादित्य को छोड़ दी और खुद अर्की विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। शिमला ग्रामीण की जनता ने वीरभद्र सिंह का पूरा सम्मान कर उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह को पांच हजार से ज्यादा वोटों से जिताया था। दिवगंत नेता वीरभद्र सिंह के बाद कांग्रेस के पास प्रदेश में कोई सशक्त नेतृत्व नहीं है। इस वजह से कई नेता खुद को मुख्यमंत्री पद का सशक्त दावेदार के तौर पर पेश कर रहे हैं। इस वजह से एक दूसरे के विधानसभा क्षेत्र में दखलअंदाजी कर कांग्रेस को कमजोर करने में लगे हैं। हाल ही में कांग्रेस के दो विधायक पवन काजल और लखविंद्र राणा पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
भाजपा का दावा कई कांग्रेसी हैं संपर्क में
भाजपा सार्वजनिक तौर पर दावा कर चुकी है कि अभी कई और विधायक उनके संपर्क में हैं। टिकट को लेकर मारामारी मची हुई है। शिमला शहरी से 40 से अधिक आवेदन आए हैं। अब जिस किसी को भी टिकट मिलेगा क्या उसके साथ बाकी 39 आवेदक और उसके समर्थक चलेंगे, यह सवाल कांग्रेस को डरा रहा है।
समय रहते शांत करनी होगी गुटबाजी
शिमला ग्रामीण से विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस के एक मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं। उपचुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से प्रतिभा सिंह को जीताने के लिए भी उन्होंने काफी मेहनत की थी। लेकिन विक्रमादित्य के ग्रामीण विस क्षेत्र से अब पांच आवेदन आने से सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस की गुटबाजी उनके ही विधानसभा क्षेत्र में खेल करने में जुटी है। इसमें जिन लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया है इनका अपने इलाके में अच्छा खासा प्रभाव है। समय रहते यहां अगर गुटबाजी शांत नहीं हुई तो यहां कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।