लेकिन बर्फबारी न होने के चलते हिमालयन माउंटेन बाइक नेटवर्क मनाली के दो युवक 4 फरवरी को साइकिल पर रोहतांग टॉप जा पहुंचे। इन युवकों में से एक नवीन बारोंगपा ने बताया कि फरवरी में रोहतांग दर्रे को बिना बर्फ के देखकर हैरानी हुई है। रोहतांग के एक हिस्से में बर्फ ही नहीं है।
उधर, लाहौल के 88 साल के रिगजिन का कहना है कि इससे पहले कई बार फरवरी तक घाटी में बर्फबारी नहीं हुई, लेकिन रोहतांग दर्रा हमेशा बर्फ से लकदक रहा है। यह पहली बार देखा जा रहा है कि फरवरी में रोहतांग बिना बर्फ के खाली पड़ा है।
मूलिंग के 81 साल के टशी फुंचोग, चौखंग के 80 साल के फुंचोग अंगरूप, रंग्वे के अमरनाथ, रमेश और बरगुल के देवप्रकाश का कहना है कि उन्होंने महसूस किया है कि साल 2000 के बाद घाटी समेत रोहतांग में हिमपात लगातार कम हो रहा है। घाटी के लोगों की मानें तो जनवरी-फरवरी के दौरान दर्रे पर दस से बीस फीट तक बर्फबारी होती है।
जीबी पंत हिमालयन एवं पर्यावरण विकास शोध संस्थान मौहल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल मानते हैं कि हिमालय रेंज में जनवरी-फरवरी में बर्फबारी न होना भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
इन्हीं दो माह होने वाली बर्फ बारी से ही ग्लेशियरों का सुरक्षा कवच मजबूत होता है। ऐसा ही रहा तो हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो जाएगी। सर्दियों में बर्फ बारी न होने से पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के साथ ही अंडरग्राउंड वाटर लेवल नीचे चला जाएगा।
जंगलों को जलाकर धुआं रोजाना वायुमंडल में प्रवेश कर रहा है उससे नमी वाले बादल सूख रहे हैं। मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर का कहना है कि बर्फ बारी न होने से कुल्लू मनाली का पर्यटन कारोबार प्रभावित हो सकता है। अधिकांश सैलानी बर्फ के दीदार को रोहतांग दर्रा का रुख करते हैं। रोहतांग में बर्फबारी न होना चिंता की बात है।