लाहौल-स्पीति जिले में 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर प्राकृतिक रूप से बनी चंद्रताल लेक में पहली बार ब्राउन ट्राउट फिश का संरक्षण होगा। ठंडे और ताजे पानी में रहने वाली ब्राउन ट्राउट यूरोपीय प्रजाति है।
इसका वैज्ञानिक नाम सालमो ट्रूटा है। ट्राउट फिश में शत-प्रतिशत प्रोटीन और विटामिन होने से सेहत के लिए काफी फायदेमंद रहती है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मार्केट में ट्राउट फिश की काफी डिमांड है।
ट्राउट फिश के प्राकृतिक तौर पर संरक्षण के साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के मकसद से मत्स्य विभाग ने पहली बार चंद्रताल झील में ब्राउन ट्राउट के संरक्षण की योजना बनाई है।
मध्य हिमालय क्षेत्र ग्लेशियरों के बीच प्राकृतिक रूप से बनी इस झील में ब्राउन ट्राउट फिश के लगभग तीन हजार बच्चे डाले जाएंगे।
बरोट फिश फार्म में ब्राउन ट्राउट का सीड तैयार
विभाग की ओर बरोट फिश फार्म में ब्राउन ट्राउट का सीड तैयार किया गया। ब्राउन ट्राउट फिश प्राकृतिक वातावरण को पसंद करती है। इसके लिए पानी ठंडा और बहता हुआ होना चाहिए।
यह प्रजाति कृत्रिम फीड नहीं लेती, बल्कि मांसाहारी है। तभी यह ब्राउन ट्राउट मछली जीवित रह सकती है। यूरोप की तरह प्राकृतिक कल्चरल होने से अभी तक मंडी जिले के बरोट में ही इस ब्राउन ट्राउट का संरक्षण किया जा रहा है।
ऊहल और लंबाडग नदियों में इस प्रजाति की मछली का संबर्धन किया जाता है। ब्राउन फिश की ग्रोथ कृत्रिम रूप से बने तालाब में नहीं होती है।
चंद्रताल लेक से चंद्र और भागा दो नदियों का उद्गम होता है, जो तांदी में आपस में मिलती हैं। यही नदी आगे चलकर पाकिस्तान में चिनाब नदी के नाम से है।
कोलेस्ट्रॉल कम करने में फायदेमंद
मत्स्य विभाग के सहायक उप निदेशक महेश कुमार का कहना है कि ब्राउन ट्राउट फिश ऐसी प्रजाति की मछली है, जिसे प्राकृतिक माहौल चाहिए।
इस प्रजाति को बढ़ावा देने के साथ एंगलिंग (मछली पकड़ना) के लिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित के उद्देश्य से लाहौल-स्पीति के चंद्रताल लेक में भी ब्राउन ट्राउट के बच्चे डाले जाएंगे।
ब्राउन ट्राउट फिश में फैट की मात्रा शून्य के बराबर होती है। इस प्रजाति की मछली में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व काफी मात्रा में होते हैं, जो हार्ट के मरीजों और कोलेस्ट्रॉल कम करने में फायदेमंद हैं।
इस मछली की बाजार में काफी डिमांड है। प्रति किलो 450 से 500 रुपये तक बिकती है। ब्राउन ट्राउट नेचुरल माहौल में ही ग्रोथ करती है।
खास बात यह है कि यह मछली मांसाहारी है और जीवित जीव जंतुओं को अपना भोजन बनाती है।