एट्रियल फाइब्रिलेशन रोगियों में स्ट्रोक की रोकथाम के लिए हिमाचल प्रदेश में पहली बार लेफ्ट एट्रियल अपेंडेज (एलएए) डिवाइस का सफल प्रत्यारोपण किया गया है।
हिमाचल प्रदेश के टांडा मेडिकल कॉलेज की सुपर स्पेशलिटी सेवाओं में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। एट्रियल फाइब्रिलेशन रोगियों में स्ट्रोक की रोकथाम के लिए हिमाचल प्रदेश में पहली बार लेफ्ट एट्रियल अपेंडेज (एलएए) डिवाइस का सफल प्रत्यारोपण किया गया है। टांडा के चिकित्सकों ने यह उपलब्धि हासिल की है। इस डिवाइस के ट्रांसप्लांट के लिए रोगियों को पहले बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था।
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संस्थान के प्राचार्य डॉ. भानु अवस्थी ने बताया कि डॉ. मुकुल, डॉ. नरेश और डॉ. अंबुधर के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी विभाग ने यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित और एक अन्य रोगी को एलएए क्लोजर डिवाइस सफलता पूर्वक डाला गया। यह उपचार ऐसे रोगियों के इलाज के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह बहुत महंगा इलाज है जो हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही कैशलेस योजना (हिमकेयर) के तहत मुफ्त में प्रदान किया जाता है। मरीजों को पूर्व में इस इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था।