शिमला में तारादेवी के जंगल में भड़की आग रेलवे ट्रैक तक पंहुच गई ।
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राजधानी के जंगलों में गुरुवार को लगी भीषण आग से विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलमार्ग पर सात ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस दौरान रेलवे प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर तारादेवी और शोघी स्टेशन पर ही ट्रेनों को रोक दिया। यात्रियों को इस दौरान भारी परेशानी झेलनी पड़ी। यात्रियों को घंटों ट्रेनों में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। ट्रेनों में बैठकर यात्री आग थमने का इंतजार करते रहे। वहीं कई ट्रेनों से उतरकर सड़क से अपने गंतत्वय की ओर गए। चार घंटे बाद ट्रेनों का संचालन हुआ।
कालका से शिमला आने वाली पहली दो ट्रेनें 52457 और 04506 समय पर शिमला स्टेशन पहुंच गईं। इसके बाद सुबह 10:00 बजे शोघी के पास शिलगांव के जंगल में भीषण आग लग गई। आग की लपटें विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल ट्रैक तक जा पहुंचीं। इस दौरान कालका से शिमला आ रही 52451 ट्रेन को सुरक्षा के मद्देनजर शोघी स्टेशन पर ही रोक दिया गया। इसके साथ ही 52453, 52459, 52455 और 04563 ट्रेन भी शोघी के पीछे स्टेशन पर ही रोक दिया गया। ये ट्रेनें सैलानियों से पैक थीं। उधर, शिमला स्टेशन से डाउन में 52458 ट्रेन सुबह 10:55 बजे रवाना कर दी गई। इस ट्रेन को तारादेवी स्टेशन पर रोका गया। यह ट्रेन शिमला से कालका जाने वाले सैलानियों से पैक थी। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद इस ट्रेन से सैलानी उतर गए और सड़क से अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। वहीं 04506 ट्रेन को शिमला स्टेशन से ही नहीं भेजा गया। स्टेशन में यात्री ट्रेन के इंतजार में बैठे रहे।
जंगल में आग लगने से अग्निशमन वाहन मौके पर नहीं पहुंच पाया। वन विभाग ने लोगों के साथ मिलकर काउंटर फायर और झाड़ियों से आग पर काबू पाया। आग बूझने के दो घंटे बाद दोपहर 2:20 बजे ट्रेनों का संचालन किया गया। शाम 2:20 बजे साढ़े तीन घंटे के बाद 52458 ट्रेन को तारादेवी स्टेशन से कालका के लिए रवाना किया गया। इसके बाद शोघी स्टेशन पर खड़ी 52451 ट्रेन को चलाया गया। दोपहर 2:45 बजे ट्रेन शिमला स्टेशन पहुंची। इसके बाद आधे घंटे के अंतराल में ट्रेनें शिमला स्टेशन पहुंचीं। 52455 ट्रेन सबसे आखिरी में शाम 7:20 बजे पहुंची।