हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस में 87 रुपये का टांका लगाने वाले कंडक्टर के खिलाफ थाना छोटा शिमला में एफआईआर दर्ज की गई है। इस कंडक्टर की तैनाती स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में की गई है। औचक निरीक्षण के दौरान जब बस की चेकिंग हुई तो कुछ सवारियां बिना टिकट मिली।
यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई कंडक्टर टांका लगाते हुए पकड़े गए हैं, लेकिन पहली बार एचआरटीसी की ओर से ऐसे आरोपी कंडक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। मामला शनिवार सुबह का है। पथ परिवहन निगम के दो इंस्पेक्टर नवबहार पर बसों की चेकिंग कर रहे थे।
सुबह करीब 9.50 बजे शिमला - संजौली रूट पर चलने वाली बस को नवबहार के पास रोका। दोनों इंस्पेक्टर बस में बैठे सवारियों की टिकट चेकिंग करने लगे। बस में कुल 18 सवारियां थी। यह बस ओल्ड बस स्टेंड से आ रही थी। इसमें 13 सवारियों के पास टिकट नहीं थी।
आरोप है कि इन सवारियों से कंडक्टर ने किराया तो वसूल लिया था लेकिन टिकट नहीं दिया। इंस्पेक्टर ने जब इस बारे में कंडक्टर से पूछा तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। उधर, एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगामी छानबीन अमल में लाई जा रही है।
केवल पांच सवारियों को दिए थे टिकट
कुल तेरह सवारियां बिना टिकट पाई गई। इस बस में छोटा शिमला से संजौली जाने वाले 9 यात्रियों को टिकट नहीं दी गई आरोप है इन यात्रियों का किराया 54 रुपये कंडक्टर ने जेब में रख दिया। 3 सवारियां टॉलैंड से संजौली की थी इनसे 21 रुपये लिए लेकिन टिकट नहीं दिया। इसी तरह एक सवारी शिमला बस स्टेंड से संजौली के लिए बैठी सवारी से 12 रुपये लिए गए लेकिन टिकट नहीं था। कुल मिलाकर आरोपी कंडक्टर पर 87 रुपये की गड़बड़ी का आरोप है।
टैक्सी चालक पर 80 रुपये की हेराफेरी का आरोप
आईजीएमसी - लक्कड़ बाजार रूट पर चलने वाली एचआरटीसी टैक्सी का भी रविवार को औचक निरीक्षण किया गया। लक्कड़ बाजार चौकी के पास टैक्सी का जब निरीक्षण किया गया तो इसमें सात सवारियां थी इनमें से चार सवारियों के पास टिकट नहीं था। आरोप है कि ड्राइवर ने सवारियों से टिकट के पैसे ले लिए थे लेकिन टिकट नहीं दिया था। ड्राइवर पर 80 रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगा है।
जांच के बाद होती है कानूनी कार्रवाई
एचआरटीसी प्रबंधन ऐसे मामलों में पहले अपने स्तर पर जांच करता है। जांच में यदि कंडक्टर जानबूझ कर गड़बड़ी करता पाया जाता है और इसके ठोस साक्ष्य उपलब्ध होते हैं तो मामला कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के सुपुर्द कर दिया जाता है। स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत के तहत ट्रेनिंग करने वाले यदि ऐसे किसी मामले में दोषी जाए जाते हैं तो उन्हें तुरंत ट्रेनिंग से ड्रॉप कर दिया जाता है।