कोरोना के कहर के चलते इस साल लहसुन के मुनासिब दाम न मिलने के कारण किसान काफी मायूस हैं। कोरोना के चलते बाहरी राज्यों के व्यापारियों के न आने और सप्लाई कई राज्यों न पहुंचने से लहसुन की कीमत उम्दा नहीं मिल रही है। शुरूआती दौर में ही लहसुन मंडियों में 50 से 55 रुपये तक बिक रहा है, जबकि पिछले वर्ष लहसुन 120 से 140 रुपये प्रतिकिलो तक बिका था।
ऐसे में किसानों का खेती पर किया खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। घाटी के किसान अमित ठाकुर, रामनाथ, ज्ञान ठाकुर, अनूप ठाकुर, दविंद्र, सुशील भंडारी ने कहा कि उन्होंने लहसुन बीज 150 रुपये प्रति किलो तक खरीदा है। खेतों में भी लहसुन तैयार करने के लिए किसानों को काफी खर्चा भी हुआ है, लेकिन मंडियों में अब दाम बेहद कम हैं। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार की व्यवस्था भी ढुलमुल नजर आ रही है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। गौर रहे कि जिले में लहसुन का कारोबार करोड़ों में होता है। कुल्लू जिले से लगभग 300 ट्रक लहसुन बाहरी राज्यों को भेजा जाता है।
वर्तमान में 1200 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती हो रही है, लेकिन इस साल दाम उम्दा न मिलने से किसान काफी मायूस है। इस संबंध में कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति मार्केटिंग कमेटी के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि मंडियों में ए श्रेणी का लहसुन 50 से 55 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रहा है। कोरोना के चलते बाहरी राज्यों को सप्लाई नहीं हो रही है। इसके लिए सरकार प्रयासरत है।