सेब, नाशपाती, आड़ू की बागवानी में भी होती है इस्तेमाल
भारती शर्मा
शिमला। किसानों और बागवानों को रबी सीजन में महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। खेती और बागवानी में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले एनपीके 16-16-16 उर्वरक (खाद) के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। दामों में प्रति बोरी 75 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों की उत्पादन लागत में इजाफा होना तय माना जा रहा है।
हिमफेड के माध्यम से वितरित किए जाने वाले इस उर्वरक की 50 किलो की बोरी जो पहले 1,675 रुपये में उपलब्ध थी अब 1,750 रुपये की हो गई है। इसके अलावा हिमफेड के सेंटरों पर यूरिया 266.50 रुपये (45 किलो), एनपीके 12-32-16 की 50 किलो की बोरी
1900 रुपये और एमओपी की बोरी 1800 रुपये में मिल रही है। बागवानों का कहना है कि सेब, नाशपाती, आड़ू और अन्य सब्जियों की खेती में संतुलित उर्वरक के रूप में एनपीके 16-16-16 की अहम भूमिका है। फलदार पौधों की अच्छी पैदावार और उत्पादन के लिए इसका नियमित उपयोग किया जाता है, इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम समान मात्रा में पाया जाता है। इसकी वजह से रबी सीजन में इसकी ज्यादा मांग होती है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब पहले से ही खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। बीज, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और सिंचाई से जुड़े खर्चों में पहले ही इजाफा हो चुका है। ऐसे में उर्वरकों के दाम बढ़ना किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन रहा है।