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हिमाचल: तीन हजार और फर्जी डिग्रियां बेचे जाने के हार्ड डिस्क में मिले सबूत

Tue, 23 Feb 2021 04:48 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामला(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले की तफ्तीश में जुटी हिमाचल प्रदेश पुलिस और सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) का शिकंजा मानव भारती विश्वविद्यालय पर कसता जा रहा है। जांच एजेंसी को अब करीब तीन हजार और फर्जी डिग्रियां बेचे जाने के सबूत मिले हैं।  सूत्रों के अनुसार ये सबूत उन 55 हार्ड डिस्कों के डाटा से मिले हैं, जिन्हें छापा मारकर एसआईटी ने अपने कब्जे में लिया था। दरअसल, जांच टीम ने मानव भारती विश्वविद्यालय में दबिश के दौरान 55 हार्ड डिस्कों को कब्जे में लिया था, जिनमें से अब तक 20 के डाटा को खंगाला जा चुका है।

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अभी तक कुल 41 हजार डिग्रियां मिली हैं, जिनमें से 36 हजार के फर्जी होने और पांच हजार के सही होने की हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग पुष्टि कर चुका है। अब तीन हजार और फर्जी डिग्रियों को भी आयोग से सत्यापित कराया जा रहा है ताकि केस में सबूत के तौर पर इन्हें भी शामिल किया जा सके। इन डिग्रियों को जिन लोगों को आवंटित किया गया है, उनसे भी संपर्क कर मूल डिग्री को अपने कब्जे में लेने के लिए जांच टीम लगातार कदमताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि बाकी डिस्क के डाटा को खंगालने के बाद फर्जी डिग्रियों की असली संख्या सामने आ पाएगी। 

194 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज
मानव भारती विश्वविद्यालय के मालिक राज कुमार राणा की 194 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज की जा चुकी है। विशेष जांच टीम अब राणा के परिवार को भारत लाकर उनके नाम से खरीदी गई संपत्तियों को भी जब्त करने की कवायद में जुटी है। दरअसल, जांच में पता चला है कि करीब 387 करोड़ रुपये का काला धन फर्जी डिग्रियां बेचकर कमाया गया है। इसके बाद राणा ने खुद व परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खड़ी कर लीं। परिवार विदेश में है और हिमाचल प्रदेश आए बिना उनकी संपत्तियों को अटैच नहीं किया जा सकता है। इसलिए सीआईडी विदेश मंत्रालय के जरिये राणा की पत्नी व बच्चों के प्रत्यर्पण को लेकर प्रयास कर रही है। 

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