1905 के भूकंप में नष्ट हो गया था मंदिर
16वीं सदी में मंडी के राजा सूरज सेन ने यहां माता का भव्य मंदिर बनवाया जोकि 1905 के भूकंप में धराशाही हो गया। उसके बाद यहां फिर से मंदिर का निर्माण किया गया। आज मंदिर का संचालन श्री नैणा देवी बाबा धजाधारी मंदिर कमेटी रिवालसर की ओर से किया जाता है। मंदिर कमेटी के प्रधान धर्मपाल शर्मा ने बताया कि रोजाना लगभग एक हजार लोग माता रानी के दरबार में हाजरी भरते हैं जबकि नवरात्र में यह संख्या 4 से 5 हजार तक पहुंच जाती है। रोजाना मंदिर में लंगर व्यवस्था सुचारू रहती है और यहां हर भक्त के रहने-खाने की उचित व्यवस्था मंदिर कमेटी की ओर से की गई है।
मन्नतें पूरी होने पर चढ़ाई जाती हैं सोने-चांदी की प्रतिमाएं
सरकाघाट निवासी शिल्पा चोपड़ा ने बताया कि उन्हें आंखों की समस्या थी, जिसका असर आगे उनकी संतानों पर भी पड़ सकता था। उन्होंने माता के दरबार में आकर मन्नत मांगी। आज उनकी आंखों की समस्या भी ठीक है और बच्चों को भी कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने मन्नत पूरी होने पर माता के दरबार में सोने की आंखों की प्रतिमाएं अर्पित की थीं। एक अन्य श्रद्धालु परवीन गुप्ता ने बताया कि माता की महिमा अपरंपार है। यहां से कोई भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता।