हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने 1 अक्तूबर 2025 को संजय गुप्ता को मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा, जबकि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पहले से तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य के सबसे संवेदनशील प्रशासनिक पद पर ऐसे अधिकारी की नियुक्ति संस्थागत ईमानदारी और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने 9 अक्तूबर 2024 को जारी संशोधित दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। इन नियमों के क्लॉज-7 में स्पष्ट किया गया है कि अखिल भारतीय और केंद्रीय सिविल सेवा के अधिकारियों को किसी भी संवेदनशील पद पर नियुक्त करने से पहले उनकी विजिलेंस क्लीयरेंस की जांच अनिवार्य होगी। याचिका में कहा गया कि मुख्य सचिव का पद राज्य प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा पद माना जाता है, इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। अगली सुनवाई को राज्य सरकार को इस नियुक्ति पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।