ऋण-जमा अनुपात में सोलन और सिरमौर जिला के बैंक अव्वल हैं। कांगड़ा और हमीरपुर के बैंकों का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। नौ साल से लगातार कम हो रहे अनुपात पर प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग ने हैरानी जताते हुए सुधार करने के निर्देश दिए हैं। वीरवार को शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 169वीं बैठक में यह आंकड़े सामने आए। सात जिलों के बैंकों में ऋण-जमा अनुपात 40 फीसदी से कम रहा। बिलासपुर में अनुपात 25.27 फीसदी, हमीरपुर में 22.45, कांगड़ा में 23.64, लाहौल-स्पीति में 25.91, मंडी में 27.20, ऊना में 30.19 और चंबा में 31.32 फीसदी ऋण-जमा अनुपात रहा है। किन्नौर में 48.97 फीसदी, कुल्लू में 41.83 और शिमला में 43.70 फीसदी रहा है। सोलन जिला में सबसे अधिक 73.38 और सिरमौर में 71.13 फीसदी ऋण-जमा अनुपात रिकॉर्ड हुआ है।
प्रदेश का कुल अनुपात 37.18 फीसदी है। प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग ने कहा कि राज्य में ऋण-जमा अनुपात मार्च 2023 में 40.13 फीसदी से बढ़कर जून 2023 में 44.30 फीसदी हो गया है। हालांकि मार्च 2015 से इसमें लगातार कमी आ रही है। मार्च 2015 में प्रदेश का अनुपात 50 फीसदी से अधिक था। यूको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्वनी कुमार ने कहा कि मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का संचयी लाभ एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। बैठक में यूको बैंक के अंचल प्रबंधक प्रदीप आनंद केशरी, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक आरएस अमर, नाबार्ड से जीएम डॉ. अजय कुमार सूद ,राज्य स्तरीय बैंकर समिति की प्रभारी कुसुम गुप्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे।