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बिजली कानून में संशोधन के खिलाफ प्रदेश भर में प्रदर्शन

Wed, 03 Feb 2021 05:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में सीटू का हमीरपुर के गांधी चौक पर धरना प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
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बिजली कर्मचारी और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति के आह्वान पर बुधवार को पूरे प्रदेश में विंग, वृत्त और मंडल स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर बिजली कंपनियों के निजीकरण का विरोध किया गया। शिमला में बिजली बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस के बाहर कर्मचारियों और अभियंताओं ने बिजली कानून-2021 के खिलाफ हल्ला बोला। राज्य बिजली बोर्ड पावर इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव तुषार गुप्ता भी मौजूद रहे। 

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बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली कानून 2003 के अधीन बिजली बोर्डों के विघटन के बाद बिजली कंपनियों की खराब स्थिति से सबक न लेते हुए इसके विपरीत बिजली कंपनियों को निजी हाथों में देने के लिए अडिग है। 

जिन राज्यों में बिजली बोर्डों का निजीकरण हुआ। वहां एक ओर निजी कंपनियां बिजली क्षेत्र की सेवाएं देने मे बुरी तरह विफल रहीं, वहीं विद्युत दरों में कई गुणा वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार संसद के चालू बजट सत्र में अब बिजली संशोधित बिल 2021 ड्राफ्ट लाई है। कानून में विद्युत वितरण के लिए मौजूदा लाइसेंसिंग प्रणाली को समाप्त करने का प्रावधान रखा गया है।
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लाइसेंस समाप्त करने का अर्थ होगा कि निजीकरण की आंधी में विद्युत वितरण का कार्य मनमाने ढंग से अपने पसंदीदा कॉरपोरेट घरानों और ठेकेदारों तक को दिया जाएगा। निजीकरण के बाद पेंशनरों की पेंशन अदायगी पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनियन किसानों के आंदोलन का भी समर्थन करती है। बिजली संशोधन कानून के साथ-साथ कृषि कानूनों को निरस्त करने की भी मांग करती है।

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