एशियन गेम्स में रोहड़ू के फरयुं कोटी पुजारली-4 के सेना के जवान पंकज शर्मा भारतीय वॉलीबाल टीम में खेल रहे हैं। पंकज सेना की डोगरा रेजिमेंट में हैं। वे सर्विसेज से भी खेल चुके है। उनके गांव और रोहड़ू क्षेत्र के लोग पंकज के मुकाबले को लेकर उत्साहित हैं।
पंकज के पिता प्रकाश शर्मा सहित पूरे परिवार को बेटे से एशियन गेम्स में मेडल जीतने की उम्मीद है। पंकज 2007 में हिमाचल से स्कूल नेशनल, 2007-08 में यूथ नेशनल और 2009-10 में सीनियर नेशनल खेल चुके है। वे रोहड़ू खेल छात्रावास से पढ़े हैं।
वॉलीबाल कोच सतीश शर्मा ने बताया कि एशियन गेम्स में रोहड़ू के शरोंथा, अड़ाल के वॉलीबाल कोच रामेश्वर शर्मा बतौर वॉलीबाल रेफरी हिस्सा लेने गए हैं। सतीश ने पंकज और कोच रामेश्वर को एशियन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
एशियन गेम्स की तलवारबाजी स्पर्धा (महिला वर्ग) में हिस्सा लेने वाली भारत की चार सदस्यीय टीम में हिमाचल की बेटी भी शामिल है। टीम के साथ रोहड़ू की रहने वाली ज्योतिका दत्ता इंडोनेशिया पहुंच गई हैं।
ज्योतिका प्रदेश की पहली खिलाड़ी हैं, जो तलवारबाजी में भारतीय महिला टीम का एशिया खेलों में प्रतिनिधित्व करेंगी। एशियन गेम्स के लिए ज्योतिका ने 45 दिन औरंगाबाद और पटियाला में अभ्यास किया।
ज्योतिका प्रदेश के छोटे से कस्बे रोहडू की रहने वाली है। पिता दिनेश दत्ता हिमाचल नागरिक आपूर्ति में प्रभारी तथा माता हिमाचल विद्युत विभाग में प्रमुख प्रारूपकार के पद पर कार्यरत हैं।
एशियन गेम्स में सूबे की तीन महिला हैंडबाल खिलाड़ी दमखम दिखा रही हैं। तीनों खिलाड़ी मोरसिंघी स्थित हैंडबाल नर्सरी में वर्ष 2011 से प्रशिक्षण ले रही हैं। एक खिलाड़ी 11वीं कक्षा की छात्रा है। कोच स्नेहलता का कहना है कि भारतीय टीम के दो मैच हो चुके हैं।
इसमें टीम को हार का सामना करना पड़ा है। पहला मैच साउथ कोरिया और कजाकिस्तान के साथ हुआ। इसमें भारतीय महिला टीम हार गई थी। अब 21 अगस्त को नॉर्थ कोरिया के साथ अहम मैच होगा। अगर भारतीय टीम यह मैच जीत लेती है तो आगे का सफर जारी रहेगा।
हारने के बाद टीम एक अलग पूल में पहुंच जाएगी। यहां बेहतर स्थान के लिए अन्य टीमों के साथ भिड़ेगी। हैंडबाल खिलाड़ी निधि शर्मा सोलन के नवगांव की हैं। वे घुमारवीं कॉलेज में फाइनल ईयर की छात्रा हैं। उनके पिता निजी वर्कशॉप में काम करते हैं।
निधि की यह छठी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है। इससे पहले वे ढाका और लखनऊ में हुई प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। दीक्षा ठाकुर घुमारवीं निवासी हैं। वे भी घुमारवीं कॉलेज में फाइनल ईयर की छात्रा हैं।
इनकी भी यह छठी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है। इनके पिता लोनिवि में कार्यरत हैं। प्रियंका ठाकुर बिलासपुर जिले के मलोथी गांव की हैं। वे मोरसिंघी स्कूल में 11वीं की छात्रा हैं। इनके पिता किसान हैं। उनका यह पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है।