हिमाचल में बिजली उत्पादन 40 फीसदी तक कम हो गया है। प्रोजेक्टों के सभी टरबाइन नहीं चल पा रही हैं। नदियों में जलस्तर कम होने से उत्पादन कम हुआ है। नवंबर से फरवरी के बीच में सर्दी बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी बढ़ जाती है।
ऐसे में हिमाचल अपनी बिजली बेचने के बजाय खुद ही इस्तेमाल करेगा, जिससे प्रदेश के लोगों को बिजली संकट से न जूझना पड़े। ऐसे में पंजाब, हरियाणा समेत दूसरे उतरी भारत के राज्यों में बिजली संकट पैदा हो सकता है। प्रदेश सरकार अगस्त और 15 सितंबर तक 10 मिलियन यूनिट रोजाना बिजली बेच रही थी।
पिछले एक सप्ताह से 40 फीसदी कम बिजली बेची जा रही है। अब रोजाना साढ़े पांच से छह मिलियन यूनिट के बीच ही बिजली एक्सचेंज में या दूसरे राज्यों को दी जा रही है।
उत्पादन में गिरावट की आशंका
अक्तूबर आखिर तक और नवंबर के शुरू से उत्पादन में और गिरावट होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में सरकार के लिए बिजली एक्सचेंज में देना या फिर दूसरे राज्यों को बेच पाना संभव नहीं होगा।
शेयर से मिलने वाली सरकार को बिजली राज्य विद्युत बोर्ड को देनी पड़ेगी। हालांकि, बोर्ड ने कुछ बिजली प्रदेश सरकार से लेनी शुरू कर दी है। अफसरों का कहना है कि नवंबर से फरवरी के बीच सर्दी बढ़ने के साथ उत्पादन और भी कम होगा।
इस कारण एक्सचेंज में बिजली दे पाना संभव नहीं होगा। इस अवधि में प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ जाती है।
हिमाचल पर असर नहीं
राज्य विद्युत बोर्ड के प्रबंध निदेशक पीसी नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार से कुछ बिजली ली जा रही है। नवंबर से फरवरी के बीच जरूरत पड़ने पर सरकार से और बिजली लेने को आवेदन किया जाएगा।
वैसे बोर्ड ने बारिश के मौसम के दौरान कुछ बैंकिंग की थी, वह बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिजली के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
वहीं, प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी ने कहा कि नदियों में जल स्तर कम होने के कारण बिजली का उत्पादन निश्चित तौर पर कम हो गया है। अगर बोर्ड से बिजली की मांग की गई तो बेचने के बजाय प्रदेश के उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।