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इंप्लाइज यूनियन ने किया मुख्यालय का घेराव, झुका बिजली बोर्ड प्रबंधन

Wed, 24 May 2017 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन ने बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस शिमला का घेराव किया। सैकड़ों की संख्या में प्रदेश भर से आए कर्मचारियों के विरोध के बाद हरकत में आए प्रबंधन ने यूनियन के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाकर दो हफ्ते के भीतर मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। 
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यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि प्रबंधन ने दो हफ्ते के भीतर मांगों को सुलझाने के लिए बिजली बोर्ड निदेशक मंडल और सर्विस कमेटी की बैठक बुलाने की बात मानी है। यूनियन ने बोर्ड प्रबंधन को ग्रेड पे और अन्य मुद्दों को 14 जून तक हल करने का समय दिया।

कहा, इस बीच मामलों को हल नहीं किया गया तो यूनियन पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन तेज करेगी। प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन द्वारा तीन वर्ष पहले बोर्ड की 48 तकनीकी और अन्य श्रेणियों के वेतन को पंजाब बिजली कंपनी के बराबर लाने के लिए घटा दिया था।
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यह न्यायसंगत नहीं है और तथ्यों से परे है। इस कारण इन श्रेणियों के कर्मचारियों के वेतन में कटौती हुई है। यदि बोर्ड प्रबंधन वर्ग पंजाब बिजली कंपनी की तर्ज पर वेतन देना चाहता है तो वहां इन श्रेणियों को दिए जा रहे टाइम स्केल को भी इन 48 श्रेणियों के कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए था।
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ये हैं बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन की मांगें

उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों के वेतन को कम करने वाले कार्यालय आदेश को तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। हीरालाल वर्मा ने पदोन्नति पर बढ़ी हुई ग्रेड पे के लिए दो साल की शर्त को खत्म करने की मांग की। उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खडे़ किए। 

कहा कि पदोन्नति पर दो साल की शर्त को हटाने के लिए दूसरे विभागों, निगमों व बोर्डों के कर्मचारियों के साथ मिलकर संयुक्त लड़ाई लड़ी जाएगी। यूनियन के सलाहकार ओमप्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड में 800 से अधिक करुणामूलक के मामले वर्ष 2006 से लंबित पडे़ है। उप महासचिव जगमेल ठाकुर ने कहा कि बिजली बोर्ड में पिछले 30 वर्षों से विद्युत सब स्टेशनों में कई गुणा वृद्धि हुई है।

लेकिन सब स्टेशन के स्टाफ  के अभाव के कारण इनको या तो ठेके पर दिया गया है या दूसरी श्रेणी के कर्मचारियों को नियुक्त कर काम कार्य चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सब स्टेशनों में बोर्ड के निदेशक मंडल द्वारा 21 मार्च को 550 पदों की स्वीकृति दी थी लेकिन अभी तक फाइल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के चक्कर ही काट रही है। इससे सब स्टेशनों का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
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