हिमाचल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग अनूठी पहल कर रहा है। प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों के 136 मतदान केंद्रों की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के जिम्मे रहेगी। इसमें मतदान कराने से लेकर रिटर्निंग अफसर की जिम्मेदारी भी महिलाएं निभाएंगी।
विधानसभा चुनाव की तैयारी की समीक्षा को लेकर शिमला पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त अचल कुमार जोति ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष मतदान व मतगणना के लिए हर विधानसभा क्षेत्र के एक-एक पोलिंग स्टेशन की ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों के मतों की साथ गिनती कराकर उनका परिणाम प्रदर्शित किया जाएगा।
हालांकि, ये पोलिंग स्टेशन क्रम रहित आधार पर चुने जाएंगे। इससे पहले आयोग ने प्रदेश के सभी विभागों के नोडल अफसरों, डिविजनल कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, डीसी व एसपी के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की और कई निर्देश दिए।
भारत के निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत, सुनील अरोड़ा, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा, उप निर्वाचन आयुक्त संदीप सक्सेना, सुदीप जैन और प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुष्पेंद्र राजपूत आदि इस मौके पर मौजूद रहे।
सवा लाख मतदाता जुड़े
जोति ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 49.50 लाख मतदाता हैं जो इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 24.9 लाख पुरुष व 24.07 लाख महिला मतदाता हैं। चार एनआरआई और 12 थर्ड जेंडर के मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में इस बार सवा लाख नए वोटर मतदाता सूची में शामिल हुए हैं। इनमें करीब 41 हजार एक युवा हैं जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। करीब 47 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए भी गए हैं। जोति ने बताया कि सर्विस मतदाताओं के लिए मतदाता सूची के अंत में डी नोवो बनाया जा रहा है जिसमें अब तक 63,200 फार्म आयोग को मिल चुके हैं।
मूलभूत सुविधाओं से लैस होंगे मतदान केंद्र
सीईसी ने बताया प्रदेश में कुल 7479 पोलिंग स्टेशन हैं। इनके अलावा 37 आग्जिलरी पोलिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं। सभी डीसी को निर्देश दिए गए हैं कि हर बूथ पर पोलिंग असिस्टेंस बूथ तैयार किए जाएंगे। बताया कि रैंप, पीने का पानी, शौचालय, बिजली व वेटिंग रूम जैसी बेसिक सुविधाएं हर बूथ पर मुहैया कराई जाएगी ताकि किसी मतदाता को परेशानी का सामना न करना पड़े।