विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे दावेदार सोशल साइट्स पर सक्रिय हो गए हैं। नेताओं ने अपने फेसबुक पर पेज बनाकर प्रचार शुरू कर दिया है, लेकिन इस बार निर्वाचन आयोग की इस पर पैनी नजर रहेगी।
सोशल साइट्स फेसबुक, यू ट्यूब, ट्विटर पर पोस्ट होने वाली प्रचार सामग्री प्रत्याशियों के चुनावी खर्च में जुड़ेगी। आचार संहिता लागू होते ही हर जिले में आयोग की मीडिया सर्टिफिकेशन एंड कन्टेंट मानीटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) बनेगी।
प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया पर प्रचार में इंटरनेट और क्रिएटिव टीम के भुगतान का ब्यौरा देना होगा। यह खर्च प्रत्याशी के खाते में जुड़ेगा। प्रत्याशियों को सोशल मीडिया पर प्रचार पर जिला निर्वाचन अधिकारी के अधीन बनने वाली एमसीएमसी नजर रखेगी।