हिमाचल में पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की ओर से ताजा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत अवैध कब्जा साबित होने पर ही प्रत्याशी पंचायत चुनाव से बाहर होंगे। राज्य चुनाव आयोग ने इसको लेकर सि्थति साफ कर दी है। इसमें खास यह है कि यदि चुनाव जीतने के बाद आरोप साबित हो गए तो संबंधित प्रतिनिधि को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा।
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अगर किसी व्यक्ति और परिवार वालों के खिलाफ अवैध कब्जे की शिकायत है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में व्यक्ति चुनाव लड़ने का हकदार होगा। आरोप सिद्ध होने वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। हिमाचल में 102 के करीब पंचायत प्रधानों, उपप्रधानों पर अवैध कब्जे और विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, लेकिन इनमें अधिकांश प्रतिनिधियों के खिलाफ अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।
हिमाचल में अगर कोई व्यक्ति प्रधान, उपप्रधान की शिकायत करता है तो उन मामलों को एसडीएम कोर्ट में सुना जाता है। यहां से प्रधानों को दोषी या आरोपों से बरी किया जाता है।
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इस बार नामांकन रद्द होने का कारण भी जान सकेंगे प्रत्याशी
भूताशन शर्मा/सरकाघाट (मंडी)-पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में इस बार प्रत्याशी नामांकन रद्द होने का कारण जान पाएंगे। नामांकन रद्द होने पर सहायक निर्वाचन अधिकारी को रद्द करने के संबंध में टिप्पणी करनी होगी। पूर्व में बिना टिप्पणी ही नामांकन रद्द किया जाता था, जिसमें इस बार फेरबदल किया गया है।
इस निर्णय से प्रत्याशियों को राहत मिलेगी। पंचायत चुनाव में इस बार प्रत्याशियों के नामांकन पत्र रद करने पर सहायक निर्वाचन अधिकारी को लिखित में कारण बताना होगा। छंटनी में त्रुटियां पाई जाने पर सहायक निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्र को रद्द कर सकते हैं। रद्द करती बार सहायक निर्वाचन अधिकारी को लिखित में रद्द करने का कारण स्पष्ट करना होगा।
पूर्व में नामांकन पत्र में त्रुटियां होने पर सीधे तौर पर सहायक निर्वाचन अधिकारियों की ओर से रिजेक्ट लिखा जाता था। इसमें रिजेक्ट करने के संबंध कोई कारण नहीं दिया जाता था। जिससे कई बार नामांकन पत्र रद्द होने की सूरत पर माहौल गहमागहमी वाला हो जाता था। इस बार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में नामांकन रद्द होने पर प्रत्याशी इसका कारण भी स्पष्ट तौर पर जान पाएंगे।
इस बार चुनकर आएंगे नए चेहरे
पंचायती राज संस्थाओं में इस बार 80 फीसदी नए चेहरे चुनकर आएंगे। पुराने 20 फीसदी प्रतिनिधियों को ही इस बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। आरक्षण रोस्टर के चलते पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव में नए लोगों को ताल ठोकने का मौका मिल रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2010 पंचायत आरक्षण रोस्टर का आधार माना है।
इसी के चलते इस बार पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव में 80 फीसदी सीटों पर नए लोगों को मौका मिलेगा। पंचायती राज संस्थाओं के दूसरे चरण में 2436 पंचायतों में चुनाव होने जा रहा है। पहले चरण में भरमौर, पांगी और स्पीति के ब्लॉक में पंचायत चुनाव हो चुका है जबकि कांगड़ा जिले की 748 पंचायतों में दूसरा चरण खत्म होने के बाद चुनाव की तिथि घोषित की जाएगी।
इसके बाद लाहौल उपमंडल की 28 पंचायतों और कुल्लू जिले के आनी ब्लॉक की ग्राम पंचायत जाबन, नमहोग और नग्गर ब्लॉक की करजन और सोयल पंचायत का कार्यकाल जून, 2016 में पूरा होना है।
जिला परिषद पर सबसे ज्यादा जोर
हिमाचल में इस बार जिला परिषद को सीट को विधायक की सीट से कम नहीं आंका जा रहा है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेता जिला परिषद की सीटों पर अपना कब्जा जमाने के लिए जोड़ तोड़ में जुटी है। दोनों दलों ने जिला परिषदों की सीट पर कब्जा करने के लिए ब्लॉक और जिला अध्यक्षों से पार्टी समर्थित तीन तीन लोगों का एक पैनल मांगा है। इनमें से पाटी एक के नाम पर मोहर लगाएगी।
प्रदेश के दूसरे चरण मे कुल 2436 पंचायतों में 192 सीटों पर जिला परिषद सदस्यों के चुनाव होने हैं। कांगड़ा जिले की 748 पंचायत और लाहौल उपमंडल की 28 पंचायतों और कुल्लू जिले के आनी ब्लॉक की ग्राम पंचायत जाबन, नमहोग और नग्गर ब्लॉक की करजन और सोयल पंचायत को छोड़कर अन्य पंचायतों में दूसरे चरण का मतदान हो रहा है। हालांकि पार्टी का मानना है कि यह चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे हैं लेकिन चुनाव में चेहरा पार्टी का ही होगा।
हिमाचल में चाहे मूसलाधार बारिश, बर्फबारी या फिर सड़कें बंद हो, पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव निर्धारित समय पर ही होंगे। हिमाचल में मौसम ने करवट ले ली है, बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है।, सड़के बंद है, वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त टीजी नेगी ने बताया कि हिमाचल में पहले भी बर्फबारी और बारिश हुई है। लेकिन चुनाव का शेड्यूल नहीं बदला गया है। नामांकन और चुनाव निर्धारित समय पर ही होंगे।