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अठारह अधिकारी और कर्मचारी मिले गैरहाजिर

Wed, 29 Oct 2014 12:22 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
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अधिकतर सरकारी कर्मचारी से लेकर अधिकारियों की अपने-अपने कार्यालयों में देरी से पहुंचने की आदत बन गई है। इससे पब्लिक परेशान है। मंगलवार को डीसी बलराज सिंह के आदेश पर करनाल, घरौंडा व तरावड़ी में छापेमार कार्रवाई की गई, जिसमें करनाल के छह कर्मचारी और घरौंडा के तीन अधिकारी समते छह कर्मचारी गैरहाजिर और तरावड़ी में आठ में से दो कर्मचारी ड्यूटी पर मिले।
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इनकी गैरहाजिरी लगाकर डीसी को रिपोर्ट सौंप दी गई है। मंगलवार को डीसी बलराज सिंह अपने कार्यालय में 8 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। डीसी ने सोमवार दोपहर बाद आदेश पारित किया था कि मंगलवार से सभी अपने निर्धारित समय पर आएंगे और नियमित रूप से टाइम टु टाइम काम करेंगे।

ड्यूटी के दौरान लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लघु सचिवालय में तकरीबन सभी कर्मचारी और अधिकारी सुबह नौ बजने से पांच मिनट पहले पहुंच गए। इसके अलावा बिजली निगम, पब्लिक हेल्थ, सिविल अस्पताल, हुडा  सहित अनेक विभाग जहां पब्लिक को रोजाना काम होते हैं। इन कार्यालयों में कर्मचारी सुबह नौ से शाम पांच बजे तक नियमित रूप से ड्यूटी पर तैनात नहीं रहते। मौजूदा स्थिति में यदि कोई कर्मचारी सुबह जल्द आते हैं तो दोपहर बाद सीट पर नजर नहीं आते। फाइलों के ढेर लगे रहते हैं और कुर्सी खाली रहती है।
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कौन सा कर्मचारी या अधिकारी कब आएगा, कहां गया है, आएगा या नहीं, इस बारे में विभागों के एक दूसरे कर्मचारी या अधिकारियों को भी पता नहीं होता। इससे लोगाें को अपने कार्य करवाने के लिए कई दिन तक चक्कर काटने पड़ते हैं। मंगलवार दोपहर पौने एक बजे सेक्टर-12 के बिजली निगम के कार्यालय में यही स्थिति देखने को मिली। करनाल स्थित नगर निगम में सुबह नौ बजे एडीसी गिरीश अरोड़ा, सीटीएम ममता शर्मा ने छापामार कार्रवाई की।

अधिकारी के इस तरह पहुंचने पर कर्मचारी और अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। गैरहाजिर कर्मचारियों को फोन करके अन्य कर्मचारियों ने बुलाया। एडीसी ने बताया कि नगर निगम से कमल, चंद्रप्रकाश, विशाल, ओमप्रकाश, दीपक और क्लर्क सुनीता रानी गैरहाजिर मिली।

अफसराें पर नकेल कसने का कदम
घरौंडा। सत्ता परिवर्तन होते ही जिला प्रशासन ने अपने विभागों पर नकेल डालनी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को देखते हुए जिला प्रशासन भी अब मुस्तैद दिखाई देने लगा है। जिला प्रशासन के आदेश पर जिला राजस्व अधिकारी ने शहर की नगरपालिका का औचक निरीक्षण किया। जिला अधिकारी के औचक निरीक्षण की सूचना मिलते ही विभिन्न विभागों में अफरातफरी देखने को मिली।


 मंगलवार की सुबह ठीक नौ बजे जिला राजस्व अधिकारी अशोक मलिक नगरपालिका पहुंचे। नगरपालिका में पहुंचते ही उन्होंने हाजिरी रजिस्टर को कब्जे में ले लिया और नगरपालिका में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के बारे में पूछताछ की। नगरपालिका में अधिकारी के औचक निरीक्षण से अफरातफरी मच गई और देखते ही देखते निरीक्षण की सूचना दूसरे दफ्तरों में आग की तरह फैल गई। निरीक्षण के दौरान नगरपालिका के सचिव रविंद्र सिंह, एमई प्रियंका सैनी, भवन निरीक्षक प्रवेश कौशिक के अलावा बेलदार रमेश, पवन व श्रीराम ड्यूटी से नदारद मिले।

 डीआरओ अशोक मलिक ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेश पर नगरपालिका का औचक निरीक्षण किया गया था। इसमें तीन अधिकारियों समेत छह कर्मचारी ड्यूटी पर नही मिले। उन्हाेंने बताया कि फोन पर उन्होंने सचिव रविंद्र सिंह से बात की, जिससे पता चला कि तीनों अधिकारी वार्ड बंदी के लिए चंडीगढ़ गए हैं, लेकिन लॉक बुक में इनके टूर के बारे में किसी प्रकार की कोई सूचना नही लिखी गई थी। सभी कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बारे में जिला डीसी बलराज सिंह को लिखित शिकायत भेज दी गई है।


तरावड़ी में छह मिले गैरजाहिर
तरावड़ी। डीसी के आदेश पर करनाल के तहसीलदार हरिओम अत्रि ने मंगलवार सुबह नौ बजे तरावड़ी नगरपालिका कार्यालय में पहुंचकर कार्यालय में तैनात कर्मचारियों को चेक किया तो वहां आठ में से केवल दो कर्मचारी ड्यूटी पर मिले। जांच अधिकारी बाकी कर्मचारियों की गैरहाजिरी लगाकर हाजिरी रजिस्टर भी अपने साथ ले गए। जांच अधिकारी हरिओम अत्री ने बताया कि वह कार्यालय खुलने के समय ठीक नौ बजे तरावड़ी नगरपालिका कार्यालय पहुंचे। कार्यालय पहुंचने पर देखा तो कार्यालय में बिल्डिंग इंस्पेक्टर व सफाई दरोगा उपस्थित रहे।  उन्होंने बताया कि करीब बीस मिनट तक वह कार्यालय में ही रहे, लेकिन उस समय तक बाकी कर्मचारी कार्यालय में नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि हाजिरी रजिस्टर व अपनी रिपोर्ट वह डीसी को सौंप चुके हैं और लेटलतीफ इन कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी इसका फैसला उन्हीं को करना है। दूसरी ओर कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि ज्यादा लेट नहीं थे।
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