प्रदेश में गर्मी बढ़ते ही जंगल आग से दहकने लगे हैं। जोगिंद्रनगर और गोहर में अग्निकांड से लाखों की वन संपदा राख हो गई है। रिहायशी इलाके भी बाल-बाल बचे हैं। अगर मौसम का मिजाज यूं तपिश भरा रहा तो अग्निकांड की घटनाएं बढ़ सकती हैं। मंडी जिले में वन विभाग ने अग्निकांड से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। ये तैयारियों अभी तक बेहतर नहीं दिख रही हैं। कुछ दिनों की गर्मी में ही जंगल दहकने लगे हैं।
गर्मियों में अब तक आठ अग्निकांड और पूरे साल में आग लगने के 31 मामले सामने आ चुके हैं। पिछली बार आग के 300 मामले सामने आए थे और भारी वन संपदा को नुकसान पहुंचा था। इससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है। इस बार आग के अधिक मामले सामने नहीं आए हैं। आग लगने का मुख्य कारण लोगों की लापरवाही सामने आई है।
आग लगने से 73.5 हेक्टेयर एरिया प्रभावित हुआ है। डीएफओ एसएस कश्यप ने कहा कि जंगलों में आग बुझाने की पूरी तैयारियां की हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में कमेटियां गठित हैं। आग लगने पर मोबाइल मैसेज से त्वरित आग पर काबू पाने के प्रयास होते हैं।
यह हैं आग के मुख्य कारण
जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण लोगों की लापरवाही है। कुछ लोग बीड़ी सिगरेट पीकर जलती हुई रास्तों में फेंक जाते हैं और वह आग लगने का मुख्य कारण रहता है। कुछ शरारती तत्व भी जंगलों को आग के हवाले कर देते हैं। इस उम्मीद में की आग लगने के बाद घास अधिक आता है। आग लगने पर जुर्माने और सजा का प्रावधान है।
यहां आ रही परेशानी
जिन स्थानों पर सड़कें होती है, वहां तो फायर ब्रिगेड की ओर से आग बुझाई जाती है लेकिन कुछ स्थान ऐसे है जहां सड़क नहीं है। वहां पर टूल्ज के माध्यम से आग बुझाई जाती है। पानी से आग बुझाने में आसानी होती है मगर टूल्ज से आग बुझाने में समय लगता है। वहां पर स्थानीय लोगों के सहयोग से ही कार्य जल्दी हो पाता है।