हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत का फैसला लागू नहीं करने पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बीसी नेगी ने तीन वर्ष पहले सुनाए गए निर्णय को लागू करने में असफल रहे शिक्षा सचिव के वेतन की कुर्की के आदेश दिए हैं। अदालत ने मुख्य सचिव को शिक्षा सचिव का वेतन कुर्क करने के संबंध में जरूरी आदेश पारित करना सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेशों में कहा कि शिक्षा सचिव की लचर प्रणाली के लिए कड़े आदेश पारित करने के लिए कोर्ट मजबूर है। हालांकि, कारावास के आदेश पारित करने के बजाय अतिरिक्त महाधिवक्ता के आग्रह पर नरम रुख अपनाते हुए सिर्फ वेतन कुर्क किया जाता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता सुरेंद्र नाथ की अनुपालना याचिका की सुनवाई के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किए।
याचिका में हाईकोर्ट की ओर से उनके पक्ष में तीन साल पहले सुनाए गए निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर की थी। अदालत ने पाया कि 7 जनवरी 2020 को खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया था। इसे लागू करने के लिए अदालत ने कई बार शिक्षा सचिव को आदेश पारित किए थे। उल्लेखनीय है कि एक अन्य मामले में भी अदालत ने शिक्षा सचिव के वेतन की कुर्की के आदेश हाल में ही दिए हैं। यह दूसरा मामला है। दोनों ही मामलों में तीन वर्ष पूर्व अदालत ने सरकार की ओर से 95 फीसदी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ के लिए हकदार ठहराया था। अभी तक याचिकाकर्ता को इस निर्णय के मुताबिक कोई सेवा लाभ नहीं दिया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश पारित किए।