शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर (फाइल फोटो)
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शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार अब पढ़ाई की रटंत पद्धति नहीं होगी। नई शिक्षा नीति रोजगार पैदा करने वाली होगी। जो बच्चे स्कूल जाने लायक नहीं हुए हैं, यह नीति उनकी भी चिंता करती है। इस नीति से 2030 तक 50 फीसदी युवाओं को व्यावसायिक दृष्टि से तैयार करेंगे। सदन में शिक्षा नीति पर नाहन के भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल की ओर से लाई गई चर्चा में करीब 20 विधायक शामिल हुए।
यह चर्चा मंगलवार से शुरू की गई थी, जो बुधवार को भी जारी रही। विधायक लिखित में भी सुझाव दे सकते हैं। अभी यह नीति दस्तावेज है। इस पर और भी काम होगा। मानसून सत्र के आठवें दिन वीरवार को सदन में नई शिक्षा नीति पर चर्चा जारी रही। इसमें डिप्टी स्पीकर हंसराज, विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, विधायक कर्नल इंद्र सिंह, सुरेंद्र शौरी, बलवीर सिंह, कमलेश कुमारी, हीरालाल, जिया लाल, जवाहर ठाकुर, इंद्र सिंह गांधी और रीना कश्यप आदि ने भाग लिया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि ज्ञान और विज्ञान की शक्तियां देश में रही हैं। हम इस शिक्षा नीति को नई शिक्षा नीति नहीं कहेंगे। महात्मा गांधी ने इस तरह की शिक्षा नीति की बात की थी। 34 साल बाद यह शिक्षा नीति आई है। मुख्यमंत्री जयराम के नेतृत्व में 24 अगस्त की कैबिनेट बैठक में शिक्षा नीति को लागू करने की मंजूरी दी गई है। इस नीति की एक-एक सदस्य को इसकी प्रति देने की बात हुई।
बहुत से सदस्यों ने शंका जाहिर की। उन्होंने कई मुद्दों को उठाने का प्रयास किया, जैसा कि इसमें नहीं है। नीति केवल दस्तावेज है। इसके बाद विस्तार से दस्तावेज तैयार होंगे। भोजनावकाश के बाद नादौन के कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने सदन में प्रदेश पर्यटन निगम के कर्मचारियों का पिछले एक महीने से वेतन नहीं देने का मामला उठाया।