हिमाचल की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह गांवों पर टिकी हुई है। देश के उलट प्रदेश में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं है।
राज्य में आज भी 80 फीसदी से अधिक दुकान, व्यापार और उद्योग धंधे ग्रामीण क्षेत्रों स्थापित किए गए हैं। महज 19.13 प्रतिशत उद्योग धंधे शहरी क्षेत्रों में हैं। राज्य के छठे आर्थिक सर्वेक्षण की प्राथमिक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
प्रदेश सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग की ओर से यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कांगड़ा में सबसे अधिक 25.4 प्रतिशत उद्योग धंधे स्थापित हैं। मंडी और सोलन का दूसरा और तीसरा नंबर है।
इन तीनों ही जिलों में सबसे अधिक 49.2 प्रतिशत उद्योग स्थापित हैं। इसके अलावा सबसे कम उद्योग धंधे लाहौल स्पीति, किन्नौर और चंबा में हैं। इन तीनों जिलों को मिलाकर महज 7.3 प्रतिशत रोजगार के साधन हैं।
हिमाचल की तस्वीर पर एक नजर
प्रदेश में कुल उद्योग धंधे======414864
शहरी क्षेत्रों में स्थापित=======79377
ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित=======335487
हथकरघा उद्योग===========12619
हिमाचल प्रदेश की शहरी आबादी 10 फीसदी से थोड़ी अधिक है। प्रदेश का ज्यादातर क्षेत्र ग्रामीण है। ऐसे में उद्योग धंधे भी ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैं। इससे निश्चित तौर पर स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की संभावना बनी रहती है। प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह ठीक है।
- प्रदीप चौहान, आर्थिक सलाहकार, हिमाचल प्रदेश