नगर निगम ने बजट में की थीं घोषणाएं, योजना से शहर में पर्यटन को मिलना था बढ़ावा, हर साल होनी थी लाखों की कमाई
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अभी तक जमीन पर नहीं उतर पाईं घोषणाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में पर्यटकों को ऐतिहासिक स्थानों और भवनों की सैर करवाने के लिए चलने वाली नगर निगम की ई-कार्ट योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। घोषणा के एक साल बाद भी नगर निगम इस योजना पर काम नहीं कर पाया। काम तो दूर, निगम ने बजट के बाद इस पर बैठकें तक नहीं बुलाईं।
बीते साल पेश किए बजट में कांग्रेस शासित नगर निगम ने शहर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के लिए ई-कार्ट चलाने की घोषणा की थी। इससे शिमला शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिलना था। साथ ही नगर निगम को हर साल लाखों की कमाई भी होनी थी। हालांकि यह सब तब होता जब नगर निगम इस पर गंभीरता दिखाता। बजट में सपना दिखाने के बाद मेयर से लेकर पार्षद तक सब इसे भूल गए। अब शहर की जनता इस पर सवाल पूछ रही है। लोगों का कहना है कि जब शहर में यह सेवा शुरू ही नहीं करनी थी तो बजट में सपने क्यों दिखाए गए। नगर निगम का दावा था कि इससे राजधानी की पहचान एक हेरिटेज फ्रेंडली सिटी के रूप में होगी। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक निर्धारित रूट में जोड़ा जाएगा। पर्यटक कई ऐतिहासिक भवनों की सैर कर सकेंगे और अन्य वाहनों पर निर्भर नहीं रहना होगा। बुजुर्ग और दिव्यांग पर्यटकों को विशेष सुविधा देने की भी बात कही गई थी। हालांकि, निगम ने ई-कार्ट खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की न ही ठेके पर इस तरह की योजना पर काम किया। परिवहन और पर्यटन विभाग के साथ समन्वय बैठकों का अभाव रहा।
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हर साल शिमला आते हैं लाखों सैलानी
राजधानी में हर साल लाखों की संख्या में देशी-विदेशी सैलानी घूमने आते हैं। ऐसे में अगर ऐतिहासिक स्थलों के बीच सुगम और पर्यावरण अनुकूल परिवहन की व्यवस्था होती है तो उन्हें घूमने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके अलावा शहर में उनका ठहरने का समय भी बढ़ता और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलता लेकिन यह सुविधा शुरू न होने के कारण आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ट्रांसपोर्ट व व्हीकल एक्ट की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी ई-कार्ट की सुविधा शुरू करने से पहले ट्रांसपोर्ट और व्हीकल एक्ट से गुजरना पड़ता है। वहीं कई तरह की अनुमति लेनी पड़ती है। जल्द यह सुविधा शुरू की जाएगी। साइकिल ट्रैक बनाने को लेकर भी काम चल रहा है।
-सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला।
ई-कार्ट तो दूर लाइटें तक नहीं लगी नगर निगम ने अपने बजट की दो घोषणाओं में बड़ी-बड़ी बातें कही थीं। कूड़े की गाड़ियों को ई व्हीकल में बदलने को कहा था। ई-कार्ट तो दूर शहर में लाइटें तक नहीं लगी हैं। लोग अंधेरों में ठोकरें खाने को मजबूर है।
बुुजुर्गों को दी घर पर टेस्ट की सुविधा
बजट में निगम ने बुजुर्गों को घर पर ही टेस्ट सैंपल देने की सुविधा देने का दावा किया था। महापौर ने खुद इस पर गंभीरता से काम किया और बुजुर्गाें के लिए यह सुविधा शुरू की। निगम ने अपनी कई सेवाएं भी अब आनलाइन कर दी हैं। इनमें जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र और किराया भुगतान की आनलाइन सुविधाएं शामिल हैं।