फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: कालीबाड़ी मंदिर में कल से शुरू होगा दुर्गा पूजा महोत्सव

विज्ञापन
विज्ञापन
संधि पूजा के लिए कोलकाता से शिमला लाए जाएंगे कमल के 108 फूल, सुबह 9:26 बजे होगी महाषष्ठी विहित पूजा
विज्ञापन

21 अक्तूबर को होगा मूर्तियों का विसर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के कालीबाड़ी मंदिर में 16 अक्तूबर शुक्रवार को मूर्ति स्थापना के साथ दुर्गा पूजा महोत्सव का आगाज होगा। इस दौरान कालीबाड़ी हॉल में बंगाली परंपरा और विधि-विधान के साथ माता सरस्वती, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी।

यह महोत्सव 21 अक्तूबर तक चलेगा। इसका मुख्य आकर्षण त्रेता युग से चली आ रही संधि पूजा होगी। इसके लिए विशेष रूप से कोलकाता से कमल के 108 फूल शिमला लाए जाएंगे। यह फूल 18 अक्तूबर को शिमला पहुंचेंगे। इन्हें आइस बॉक्स में लाया जाता है, ताकि पूजा के समय तक ताजा रखा जा सके। महोत्सव की शुरुआत 16 अक्तूबर को सुबह 9:26 बजे शारदीय दुर्गा देवी की महाषष्ठी विहित पूजा के साथ होगी। इसके बाद शाम को देवी का बोधन, आमंत्रण और अधिवास किया जाएगा।
विज्ञापन


17 अक्तूबर को सुबह 9:27 बजे शारदीय दुर्गा देवी की नवपत्रिका प्रवेश, स्थापना और महासप्तमी विहित पूजा होगी। इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और भोग लगाया जाएगा। सुबह 11 बजे पुष्पांजलि के बाद प्रसाद वितरित किया जाएगा। वहीं शाम सात बजे संध्या आरती होगी। 18 अक्तूबर को सुबह 5:52 बजे शारदीय दुर्गा देवी की महासप्तमी पूजा, पुष्पांजलि और भोग का आयोजन होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और प्रसाद वितरित किया जाएगा।

19 अक्तूबर को सुबह 6:15 बजे महाष्टमी पूजा होगी। इस दौरान पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ प्रसाद वितरित किया जाएगा। सुबह 7:25 बजे से संधि पूजा शुरू होगी। इस दौरान माता को 108 कमल के फूल चढ़ाए जाएंगे और 108 दीपक जलाए जाएंगे। संधि पूजा देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। 20 अक्तूबर को सुबह 4:42 बजे से 9:29 बजे तक महानवमी पूजा होगी। इस दौरान पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ भोग लगाया जाएगा। महोत्सव का समापन 21 अक्तूबर को होगा। इस दिन सुबह 8:30 बजे महादशमी पूजा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का समापन होगा। इसके बाद सभी मूर्तियों को विसर्जन के लिए तारा देवी स्थित आईटीबीपी परिसर के तालाब में ले जाया जाएगा। विसर्जन के बाद शाम सात बजे शांति जल प्रदान और विसर्जन सम्मेलन के साथ महोत्सव का समापन होगा। कार्य निर्वाहक समिति कालीबाड़ी के सचिव डॉ. कल्लोल प्रमाणिक ने बताया कि मंदिर में हर वर्ष शारदीय नवरात्र पर यह महोत्सव आयोजित किया जाता है।
विज्ञापन



संधि पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंड और मुंड का संहार करने के लिए मां दुर्गा ने चामुंडा का रूप धारण किया था। मान्यता है कि यह वध अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में हुआ था। इस कारण इस अवधि में मां चामुंडा की पूजा को संधि पूजा कहा जाता है। मां को प्रसन्न करने के लिए संधि पूजा के दौरान 108 कमल के फूल चढ़ाए जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें