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हाईकोर्ट के सख्त आदेश, ड्रग्स दोषी के परिजनों के चुनाव लड़ने पर लगाओ रोक

Wed, 27 Jul 2016 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं मादक पदार्थ रखने के दोषी के परिवार और रिश्तेदारों पर भी चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए। कोर्ट ने छह माह के भीतर पंचायतीराज, नगर निगम एक्ट और हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल एक्ट में जरूरी संशोधन करने के लिए कहा है।
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मादक पदार्थों के उत्पादन को खत्म करने के उद्देश्य से हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिए हैं कि वह जांच अधिकारियों को इस बाबत निर्देश जारी करें कि वे इस तरह के मामलों से जुड़े मुख्य स्रोतों को खोज निकालें।

प्रदेश और बाहरी राज्यों में मादक पदार्थ भेजने के अंतिम डेस्टिनेशन का भी पता लगाया जाए। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने उस व्यक्ति के खिलाफ भी मामला दर्ज करने के आदेश दिये हैं जिसे मादक पदार्थ की अंतिम डिलीवरी की जानी हो।
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हथियारों से लैस हो वारंट तामिल करवाने वाला पुलिसकर्मी

इस तरह के मामलों में सजा प्राप्त दोषियों पर वारंट की तामिल का जिम्मा सब इंस्पेक्टर के अधिकारी को सौंपने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया हैं कि जो भी पुलिस अधिकारी वारंट की तामिल करने जाए वह हथियारों से लैस हो।

कोर्ट ने कामर्शियल क्वांटिटी से अधिक मामलों के सुपरविजन का जिम्मा पुलिस अधीक्षक ओहदे वाले अधिकारी को सौंपने के आदेश जारी किए हैं।

बयान से मुकरने वालों पर हो विभागीय कार्यवाही
हाईकोर्ट ने अपने पिछले बयान से मुकरने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारिओं के खिलाफ  विभागीय कार्यवाही अमल में लाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट नेे केवल अच्छे व्यक्तित्व वाले अधिकारियों को इस तरह की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स में तैनात करने के आदेश दिए हैं।
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सादे कपड़ों में स्कूलों के पास तैनात करो पुलिस

हाईकोर्ट ने आईजीएमसी में आयोजित सेमिनार में उजागर किए इस तथ्य पर चिंता जताई कि 40 फीसदी युवक मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे इनकी लत में पड़ चुके हैं। कोर्ट ने शिक्षा संस्थानों के मुखिया को आदेश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके संस्थान ड्रग्स फ्री हों।

कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए वे सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारियों को शिक्षा संस्थानों के समीप तैनात करें। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करे कि कोई केमिस्ट 18 वर्ष से कम आयु के बच्चो को नशीली दवाएं न बेचे।
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